सोशल एक्टिविस्ट सैय्यद ज़रीन समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद बोली – राजनीती शब्द का एक ही मतलब “जनसेवा”

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सियासत में उत्तर प्रदेश राजनितिक गढ़ के तौर पर जाना जाता है अगर हम लखनऊ की बात करे तो पिछले चार साल से एक चेहरा ऐसा भी है जो जिले में चर्चा का केंद्र रहा है वो और कोई नहीं बल्कि लखनऊ की जानी मानी सोशल एक्टिविस्ट सैय्यद जरीन हैं।
ज़रीन राजनीतिक परिवार से ताल्लुक़ रखती है। वह अपने बेबाक अंदाज़ के लिए जानी जाती है अक्सर टीवी डिबेट पर बड़े बड़े नेताओं की बोलती बंद करते हुए नज़र आती हैं । लेकिन वह स्वाभाव में काफी सौम्य और सरल हैं। वह अपना ज्यादातर समय क्षेत्र की जनता को देती हैं।
यूं तो लखनऊ में ज़रीन की काफी फॉलोइंग है और युवाओं में काफी पॉपुलर हैं। क्षेत्र की लड़कियां अक्सर अपनी समस्याए लेकर उनके पास आती हैं। सोशल मीडिया पर युवा उनसे जुड़े पोस्ट अक्सर करते रहते हैं। फेसबुक और ट्विटर पर ज़रीन खुद भी सक्रिय रहती हैं। वह कमेंट्स का रिप्लाई भी करती हैं।

सैय्यद जरीन जिन्होंने ने कुछ दिन पहले ही समाजवादी पार्टी को ज्वाइन किया वीमेन एम्पावरमेंट पर बात करते हुए कहा कि राजनीति से लेकर फिल्म व खेल के मैदान में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में जरूरत है हमें इन जैसी तमाम बेटियों की प्रतिभा को पहचानने, निखारने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करें। आज के दौर में गांव की बेटियां, महिलाएं किसी मामले में कम नहीं हैं बस उन्हें थोड़े से मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

मैं अपने आस पास के महिलाओं से लगातार मिलती रहती हूँ, उनसे बातचीत करती हूँ और उनकी समस्याओं, उनके विचारों को सुनने और समझने का प्रयास करती हूँ। इस दौरान मुझे ऐसा लगा कि महिलाएं पहले की अपेक्षा तेजी से जागरूक हुई हैं, हर विषय को समझने के उनके नजरिये में तेजी से बदलाव हुआ है। वह अपने मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक हुई हैं। इसलिए समय-समय पर वह सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों से अपने अधिकारों को लेकर लड़ती हुई दिखाई देती हैं।

लेकिन महिलाओं के उत्थान में एक छोटी सी लकीर अभी भी खिंची हुई है। जिसको भी मैंने समझने की कोशिश की, वह है समाज की पुरुषवादी सोच। ये सोच कहीं न कहीं आज भी हमारे समाज में व्याप्त है और कई मौकों पर बाहर निकलती हुई दिखाई देती है।उन्होंने आगे कहा कि ये सोच महिला सशक्तिकरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। आज भी घर का प्रमुख पुरुष होता है। आखिर महिला क्या नहीं कर सकती? मैंने देखा है कि कई मौकों पर पुरुषवादी सोच की ओर से महिलाओं को दबाने का प्रयास किया जाता है और उन्हें घूंघट की आड़ के लायक ही समझा जाता है।

खासकर ग्रामीण इलाकों में इस तरह की सोच ज्यादा प्रभावी है। इस समस्या के समाधान के बारे में भी मैंने विचार किया हैं। ज़रीन ने कहा कि सबसे पहले महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना होगा जिससे कि वह किसी के ऊपर आश्रित नहीं रहेंगी। इससे वह अपने बारे में खुलकर सोच – विचार कर पाएंगी और स्वनिर्णय की क्षमता उनमें विकसित होगी।

बतौर सोशल एक्टिविस्ट ज़रीन का मानना ​​है कि यह उनका नैतिक दायित्व है लोगों की किसी भी तरह से मदद करें, हालांकि वह वीमेन एम्पावरमेंट के लिए सबसे ज्यादा भावुक हैं। अपने आसपास लोगो की सोच बदलने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है ।

वैश्विक महामारी में कोरोना से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए समाज में कई हाथ बढ़े, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की हरसंभव मदद की उनमें एक नाम सामाजिक कायर्कर्ता सैय्यद ज़रीन का भी हैं। कोरोना के चलते लॉकडाउन के दौरान गरीबों के सामने कोरोना से बड़ी भूख की समस्या आ खड़ी हुई, यह एक ऐसी आपदा है जो न पहले किसी ने सुनी न देखी। देश ही नहीं, पूरी दुनिया में इस कदर खौफ है कि लोगों ने खुद को अपने घरों में समेट लिया, कोरोना की दूसरी लहर के संकट के समय ऑक्सीजन के अलावा देश को सबसे बड़ी जरूरत थी मानवता की, कोरोना की दूसरी वेव में लखनऊ और उसके आस पास के इलाके के लोगो की ज़रीन ने हर संभव मदद किया है कोरोना के बारे में आगे बात करते हुए ज़रीन कहती है की अप्रैल और मई का महीना हमारे लिए एक बुरे सपने की तरह था जो शायद ही कोई भूल सकता है।

वह आगे कहती है कि मैंने सामाजिक कार्य को चुना क्योंकि यह एक ऐसा पेशा है जो समाज और लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार प्रेरित कर रहा है। सामाजिक कार्य हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है, यह रचनात्मकता की अनुमति देता है और लोगों की मदद करने और उनके जीवन पर प्रभाव डालने के लिए प्रेरणा बनता है

ज़रीन ने तीन तलाक कानून के बारे में बीजेपी की आलोचना करते हुए कहा कि यह मूलरूप में अल्पसंख्यक विरोधी, महिला विरोधी और संविधान विरोधी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कानून मुस्लिम समुदाय को ‘अपमानित’ करने का प्रयास करता है।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के काम काज को लेकर आगे बात करते हुए ज़रीन बताती है कि हमने सरकार को चुना है नेता हमारे प्रतिनिधि हैं वे चुनाव से पहले कही गई बातों के लिए चुनाव के बाद वचनबद्ध हैं। उन्हें वह काम करना ही होगा।

गौतलब है कि लखनऊ की जानी-मानी सोशल एक्टिविस्ट सैय्यद जरीन हाल ही में समाजवादी पार्टी से जुडी है राजनीति में अपने सफर के बारे में बात करते हुए बताती है कि – “वो मेरा देश नहीं. जहां अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, मेरा देश वो है, जहां इंसानियत है “। मेरी पार्टी का उद्देश्य भेद भाव और धर्म से ऊपर उठकर समाज की सेवा करना और ,यही उद्देश्य मेरा भी है।