राहुल गांधी का मामला भी कहीं लक्षदीप के सांसद मोहम्मद फैजल जैसा ना हो जाए: ज़ैद अहमद फ़ारूक़ी..

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी लक्षदीप के पूर्व सांसद मोहम्मद फैजल के इसी तरह के एक मामले मे सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी 2023 को पूरी प्रक्रिया में रोक लगा चुकी है जिसके बाद भी लोकसभा केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग ने कोई भी सीख नहीं ली है औऱ राहुल गाँधी के मामले मे 23. मार्च 2023 को सूरत की एक निचली अदालत के फैसले के बाद 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय में उनकी सदस्यता खत्म करने का लेटर जारी कर दिया इसी तरह लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह द्वारा दिनाँक 13.01.2023 को जारी की गई अधिसूचना में कहा गया था कि फैजल “सज़ा की तारीख यानी 11 जनवरी, 2023 से लोक सभा की सदस्यता से अयोग्य हैं, जो कि संविधान के अनुच्छेद 102 (एल) (ई) के प्रावधानों के संदर्भ में है। औऱ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के साथ पढ़ा जाए।”

कारावास तत्काल प्रभाव से सदन की सदस्यता खो देता है

दरअसल शीर्ष अदालत ने 10 जुलाई, 2013 को लिली थॉमस बनाम भारत संघ के मामले में अपने फैसले में यह फैसला सुनाया था कि कोई भी संसद सदस्य, विधान सभा का सदस्य या विधान परिषद का सदस्य जिसे अपराध का दोषी ठहराया जाता है और न्यूनतम दो साल की सजा दी जाती है। ‘ कारावास तत्काल प्रभाव से सदन की सदस्यता खो देता है ये बात 13.01.2023 को लोक सभा ने जारी अपनी अधिसूचना मे कहा था की फैजल 11 जनवरी, 2023 से जनप्रतिनिधि नहीं रहे हैं। आरोपी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखता था, लोकसभा सचिवालय, केंद्र सरकार औऱ भारत निर्वाचन आयोग को लक्षदीप के सांसद मोहम्मद फैजल के मामले में मुंह की खानी पड चुकी है उसके बावजूद उसने राहुल गांधी के मामले में इतनी जल्दबाजी की।दरअसल, एक आपराधिक मामले में पूर्व सांसद मोहम्मद फैज़ल की सजा के फैसले 11 जनवरी 2023 के बाद 13 जनवरी 2023 को लोकसभा महासचिव ने उनकी अयोग्यता की घोषणा करते हुए एक अधिसूचना जारी कर दी थी. इसके बाद 18 जनवरी को निर्वाचन आयोग ने प्रेस नोट जारी करते हुए 27 फरवरी को उपचुनाव की घोषणा कर दी. जिसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. और सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी 2023 को पूरी प्रक्रिया में रोक लगा दी थी जिससे लोकसभा केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग ने कोई भी सीख नहीं ली है औऱ राहुल गाँधी के मामले मे 23. मार्च 2023 को सूरत की एक निचली अदालत के फैसले के बाद 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय में उनकी सदस्यता खत्म करने का लेटर जारी कर दिया जबकि सूरत की अदालत ने अपने फैसले में राहुल गांधी को एक माह का समय दिया था जिसकी समय सीमा का लोकसभा सचिवालय को इंतजार करना चाहिए था।

राजनीतिक कार्यकर्ताओं एवं विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से मोहम्मद फैजल की सदस्यता को खत्म किया गया था और 27 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आये फैसले की वजह से आज तक उनकी लोकसभा सीट पर उपचुनाव नहीं हुआ है ना ही उनको योग ठहराया गया है यह केंद्र सरकार लोकसभा और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर एक सवाल खड़ा करता है।