रिटर्न और जोखिम के मामले में क्या है बेहतर विकल्प, म्यूचुअल फंड्स या बिटकॉइन, जानिए यहां

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बिटकॉइन ने एक बार फिर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. दुनियाभर में लोग अब बिटकॉइन समेत दूसरी क्रिप्टोकरंसी के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. हालांकि, म्यूचुअल फंड्स की तुलना में देखें तो इसमें निवेश करने के नियम से लेकर प्रक्रिया तक बिल्कुल अलग है. हम सभी जानते हैं कि बिटकॉइन एक क्रिप्टोकरंसी और म्यूचुअल फंड्स इन्वेस्टमेंट एवेन्यू है, जिसमें निवेशक अपनी रकम जमा करते हैं और इसके बाद की जिम्मेदारी फंड मैनेजर्स की होती है.

बिटकॉइन में दो तरीकों से निवेश किया जा सकता है. पहला तो आप बिटकॉइन खरीद लें और प्रॉफिट मिलने तक इसे होल्ड किए रहें. दूसरा तरीका बिटकॉइन माइनिंग का है. इसके उलट, म्यूचुअल फंड को सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी, बैंक या ब्रोकेरेज फर्म से खरीदा जा सकता है.

दोनों में सबसे बेस्ट इन्वेस्टमेंट विकल्प के बारे में बैंकबाज़ार के सीईओ अधिल शेट्टी ने बताया कि सबसे पहले तो गोल तय करना जरूरी होता है. निवेश के जरिए कितना रिटर्न पाने की उम्मीद है और इस रिटर्न के लिए कितना समय दे सकते हैं. साथ ही, निवेश से पहले जोख़िम उठाने की क्षमता का भी आकलन कर लेना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘आप किसी ऐसी चीज़ की शुरुआत नहीं कर सकते हैं, जिसमें उसे खोने का जोख़िम हो. किसी भी एसेट को उच्चतम भाव पर खरीदने से छोटी अवधि में नुकसान होता है. लेकिन, यह जानना जरूरी है कि प्रॉफिट पाने के लिए कितने समय तक इस एसेट को होल्ड करना बेहतर होगा.’

क्रिप्टोकरंसी में बढ़ती रुचि को देखते हुए शेट्टी कहते हैं कि एक छोटे निवेशक के तौर पर किसी ऐसे एसेट पर विशेष फोकस करना चाहिए, जिसमें ज्यादा उठापटक नहीं हो और पिछले कुछ समय में उसका परफॉर्मेंस बेहतर हो. यहीं पर म्यूचुअल फंड्स बेहतर विकल्प साबित होते हैं. क्रिप्टोकरंसी के मामले में निवेशकों के पास अपनी जोख़िम क्षमता के आधार पर बांजी लगाने का विकल्प भी है.

एक अन्य जानकार भी बिटकॉइन की तुलना में म्यूचुअल फंड्स में ही निवेश करने का सुझाव देते हैं. उनका कहना है कि जब कोई निवेशक शेयर खरीदता है तो वास्तव में वह कंपनी का मालिक बनता है. वो उस एसेट का हिस्सा बनते हैं, जिसकी मालिकाना हक कंपनी के पास होती है. इस प्रकार इक्विटी और म्यूचुअल फंड के मामले में सभी चीजें वास्तविक होती हैं. दूसरी तरफ, बिटकॉइन अधिकतर सट्टेबाजी की तरह होता है. अभी इस बारे में जानकारी नहीं है कि इसका बैकअप क्या है. इसके अलावा, बिटकॉइन भले ही लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न दे, लेकिन इसका अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है. इसमें जितना ज्यादा रिटर्न है, उतना ही ज्यादा जोखिम भी है.

म्यूचुअल फंड को लेकर जानकारों का यह भी कहना है कि यह रेगुलेटेड है और कई सालों में देखा जाए तो इसके जरिए मिलने वाला रिटर्न स्टेबल होता है. हालांकि, मार्केट की स्थिति के आधार पर इसमें बदलाव भी होता है. म्यूचुअल फंड में निवेश करने के अपने फायदे-नुकसान हैं. लेकिन, निवेश के ये इंस्ट्रूमेंट्स बिटकॉइन की तुलना में पारदर्शी हैं.