वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश की आर्थिक समीक्षा, देश की विकास दर तेज होने की उम्मीद

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में शुक्रवार को 2020-21 की आर्थिक समीक्षा पेश की. आर्थिक समीक्षा एक साल में देश के आर्थिक विकास का सालाना लेखा-जोखा होता है. जिसके आधार पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि पिछले एक साल से अंदर देश की अर्थव्यवस्था किस तरह की रही. किन मोर्चों पर फायदा मिला और कहां नुकसान हुआ. कुल मिलाकर आसान भाषा में यह कहा जा सकता है कि आर्थिक समीक्षा पिछले एक साल के अंदर देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश करता है.

समीक्षा की मुख्य बातें
एनएसओ के अग्रिम अनुमान के अनुसार भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर में वित्त वर्ष 2020-21 में 7.7 प्रतिशत की गिरावट रहेगी.
देश में तीव्र गति से पुनरूद्धार जारी. वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 11.0 प्रतिशत तथा बाजार मूल्य पर 15.4 प्रतिशत रहेगी.
कोविड-19 के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान को कम करने में कृषि महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इस क्षेत्र की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2020-21 में 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान.
वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान उद्योग और सेवा क्षेत्र में क्रमशः 9.6 प्रतिशत और 8.8 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है.
कोविड-19 टीके की शुरुआत के बाद से आर्थिक गतिविधियां और सामान्य हुई हैं.
वित्त वर्ष 2020-21 में चालू खाता अधिशेष जीडीपी के 2 प्रतिशत रहने का अनुमान. सेवा क्षेत्र, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा. ये क्षेत्र अब तेजी से सामान्य होने की स्थिति में आगे बढ़ रहे हैं. कृषि क्षेत्र ने बेहतर परिणाम दिए हैं.
निवेश में 0.8 प्रतिशत की मामूली कमी आने का अनुमान. पहली छमाही में 29 प्रतिशत की गिरावट.
दिसंबर 2020 में विदेशी मुद्रा भंडार अगले 18 महीनों के आयात के लिए पर्याप्त.
जीडीपी के अनुपात में विदेशी कर्ज मार्च 2020 के 20.6 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2020 में 21.6 प्रतिशत हुआ.
पांच साल से कम आयु के बच्‍चों की मृत्‍यु दर में गिरावट दर्ज की गई है.