संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने हिरासत में लिए गए म्यांमार के राजनैतिक अधिकारियों को मुक्त करने का प्रस्ताव किया पारित

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने शुक्रवार को म्यांमार में सैन्य तख्तापलट की निंदा करते हुए सर्वसम्मित से एक प्रस्ताव पारित किया और देश में मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई और आपातकाल की स्थिति को दूर करने का आह्वान किया।

UNHRC ने एक बयान में कहा, ‘म्यांमार में संकट के मानवाधिकार निहितार्थों पर एक प्रस्ताव में, जो बिना किसी वोट के संशोधित रूप में अपनाया गया, परिषद ने 8 नवंबर 2020 को हुए आम चुनाव में म्यांमार के लोगों द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए सरकार को हटाने की निंदा की और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार की बहाली का आह्वान किया।’

काउंसिल ने भी सभी लोगों को तत्काल और बिना शर्त रिहाई के लिए आवाज उठाई, जिन्हें तख्तापलट के बाद हिरासत में लिया गया था, जिसमें स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और राष्ट्रपति विन म्यिंट और अन्य लोगों शामिल है। वहीं, आपातकालीन स्थिति को खत्म करने की आवाज उठाई।

UNHRC ने आगे कहा कि म्यांमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर नजर के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के उच्चायुक्त और विशेष दूत की आवश्यकता है, जो वहां वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी ले सके। और मानवाधिकार परिषद को अपनी रिपोर्ट में अपडेट प्रदान करने के लिए कहा है। बयान के अनुसार म्यांमार के अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र के साथ जुड़ने और सहयोग करने के लिए कहा गया है।

यूरोपीय संघ (ईयू) की ओर से यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रिया द्वारा मसौदा प्रस्ताव पेश किया गया था। वोट की व्याख्या में चीन, रूसी संघ, वेनेजुएला, बोलीविया और फिलीपींस ने खुद को अलग किया।

बता दें कि म्यांमार की सेना ने देश पर अपना राज कर लिया है। देश में सभी तरह से सोशल मीडिया पर रोक लगा दी गई है। लोग वहां विरोध प्रर्दशन कर रहे हैं और सत्ता वापस देने की मांग पर अड़े हैं, लेकिन सेना आए दिन एक्शन की धमकी दे रही है।