Ukraine Crisis: विदेश मंत्रालय ने कहा- संघर्ष वाले क्षेत्रों से भारतीय छात्रों को बाहर निकालना पहली प्राथमिकता

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    Arindam-bagchi

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमारा मुख्य जोर पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष वाले क्षेत्रों से भारतीय छात्रों को बाहर निकालना है. हम रूस और यूक्रेन से स्थानीय संघर्ष विराम सहित अन्य रास्ते तलाशने का आग्रह करते हैं ताकि अपने शेष नागरिकों को युद्धग्रस्त यूक्रेन के संघर्ष वाले इलाकों से निकाल सकें. विदेश मंत्रालय ने बताया कि लगभग 300 भारतीय खारकीव में और 700 सुमी में हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने संवाददाताओं से कहा कि युद्धग्रस्त देश को लेकर प्रथम परामर्श जारी होने के बाद करीब 20,000 भारतीय यूक्रेन की सीमा छोड़ चुके हैं.

    अरिंदम बागची ने कहा कि ऑपरेशन गंगा’ के तहत अब तक 48 उड़ानों से 10,300 से अधिक भारतीयों को वापस लाया गया है. उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटे में 18 उड़ानें भारत में उतरी हैं और इसके जरिये करीब 4000 भारतीय वापस लाये गए हैं . बागची ने कहा कि यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए अगले 24 घंटों में 16 उड़ानों का कार्यक्रम है . विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ लगभग 300 भारतीय खारकीव में, 700 सुमी में हैं .’’ उन्होंने कहा कि संघर्ष वाला इलाका है हालांकि हम सभी भारतीयों को लाने के लिये लगातार प्रयास कर रहे हैं.

    कुछ इलाकों से भारतीयों को निकालने में कठिनाई पेश आने से संबंधित एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘ हम दोनों पक्षों से रास्ता तलाशने का अनुरोध कर रहे हैं ताकि हम संघर्ष वाले क्षेत्रों से अपने नागरिकों को बाहर निकाल सकें . स्थानीय संघर्षविराम से इसमें मदद मिलेगी.’’ उन्होंने कहा कि इन इलाकों में गोलाबारी चल रही है, हम नहीं चाहते है कि हमारे छात्र ऐसी जगह से गुजरें जिससे उनकों कुछ नुकसान होने की आशंका हो .

    अरिंदम बागची ने कहा कि ऐसे में हमारी दोनों पक्षों से गुजारिश होगी कि संघर्ष विराम, स्थानीय स्तर का संघर्ष विराम हो ताकि हम अपने लोगों को निकाल सकें. रूस द्वारा भारतीयों को निकालने के लिये बसों की व्यवस्था करने से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में प्रवक्ता ने कहा कि जिन बसों की बात हो रही है, वे काफी दूर हैं और जिस स्थान पर छात्र हैं..वहां से 50-60 किलोमीटर दूर हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ यह युद्ध की स्थिति है और वे बसें दूर हैं . वहां तक हमारे बच्चे कैसे पहुंचेंगे. ऐसे में रूसी पक्ष वहां आए या यूक्रेन के लोग कोई व्यवस्था करें, तभी कुछ हो सकता है. स्थानीय संघर्ष विराम से मदद मिल सकती है.’’

    प्रवक्ता ने बताया कि परामर्श के बाद खारकीव से निकल कर पिसोचिन में आए छात्रों को निकालने के प्रयास जारी हैं. उन्होंने बताया कि हमने पांच बसों की व्यवस्था की है जिसमें से दो बसें लीव के लिये रवाना हो गई हैं और 3 बसें माल्डोवा के लिये रवाना होने वाली है. उन्होंने बताया कि हम छात्रों को वहां से निकालने के लिये कुछ और बसों की व्यवस्था करने में लगे हैं.