वेब सीरीज मिर्ज़ापुर के मेकर्स को एक और झटका – सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस, अश्लीलता दिखाने का लगा आरोप

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SEASON 3

अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) की सक्सेसफुल वेब सीरीज मिर्ज़ापुर (Mirzapur) हिट तो जरूर हुई लेकिन इस बार ये सीरीज विवादों का हिस्सा बन गई हैं। बीते दिनों से मिर्ज़ापुर सीरीज कई विवादों में घिरी हुई है। इस सीरीज को लेकर इसके बैन तक की मांगे उठ चुकी हैं। इस सीरीज के मेकर्स को आये दिन विवादों का सामना करना पड़ रहा है। इस बार वेब-सीरीज ‘मिर्जापुर’ के मेकर्स और अमेजन प्राइम वीडियो की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस बार सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस सीरीज के मेकर्स को नोटिस भेज दिया है।

दरअसल इस नोटिस की पीछे एक बड़ी वजह है। एक वकील ने याचिका दायर करते हुए कहा है कि इस वेब सीरीज की कहानी में अश्लीलता दिखाई गई है। इस तरह के कंटेंट को दिखाने पर पाबन्दी लगाई जानी चाहिए। इसी याचिका पर कोर्ट ने सीरीज के मेकर्स के खिलाफ नोटिस जारी किया है। बता दने कि इस वेब सीरीज में बीना त्रिपाठी के रोल की कड़ी निंदा हो रही है। वकील द्वारा दायर की गई याचिका में खास तौर पर रसिका दुगल के चरित्र बीना के एक नौकर और उसके ससुर के साथ यौन संबंध होने पर कड़ी निंदा जाहिर की गई है।

आपको बता दें कि सीरीज में बीना के अपने ही ससुर के साथ शारीरिक सबंध बनते दिखाए गए है। इसके अलावा बीना के नौकर के साथ भी यौन संबंध दिखाए है। जिसके चलते मिर्ज़ापुर के ही याचिकर्ता ने कहा है कि जिले के नाम पर इस तरह की भद्दी और बेशर्म चीजें दिखाना मिर्जापुर की लगभग 30 लाख आबादी का अपमान है।

ये नोटिस चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने ‘मिर्जापुर’ के मेकर्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को भेजा है। इससे पहले भी बीते दिनों ही मिर्जापुर कोतवाली देहात में एक FIR दर्ज कराई गई थी जिसमें मिर्जापुर से जुड़े निर्माताओं और अभिनेताओं पर कार्रवाई की मांग हुई थी। अख्तर और सिधवानी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और मार्च के पहले सप्ताह में मामले को सूचीबद्ध किया। अख्तर और सिधवानी के खिलाफ मिर्जापुर जिले के कोतवाली देहात थाने में आईपीसी की धारा 295-ए, 504, 505, और 34 और आईटी एक्ट की 67-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ताओं के काउंसलर्स ने दलील दी कि अख्तर और सिधवानी के खिलाफ कोई अपराध नहीं किया गया।