वैज्ञानिकों की चेतावनी – कोरोना वायरस बदल रहा स्वरूप, भारत में कम लोगों को लग पाया टीका

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प्रसिद्ध विषाणु विज्ञानी डॉ. डब्ल्यू इयान लिपकिन ने कहा है कि भारत की आबादी का कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण का प्रतिशत बहुत कम है, ऐसे में विभिन्न क्षेत्रों को फिर से खोलने के लिए देश के पास अभी उस तरह के सुरक्षा कवच नहीं हैं, जिनकी जरूरत है. विभिन्न क्षेत्रों को खोले जाने पर विषाणु विज्ञानी ने कहा कि भारत की जनसंख्या के जितने प्रतिशत को अब तक टीका लगाया गया है वह बहुत कम है. और वायरस अपना स्वरूप भी बदल रहा है, जिसका असर देखने को मिल सकता है.

एक कार्यक्रम में लिपकिन ने कहा कि भारत, दुनिया का सबसे बड़ा टीका निर्माता है जिस पर देश को गर्व होना चाहिए. लेकिन ‘‘देश की आबादी के 20 प्रतिशत से कम हिस्से का ही टीकाकरण हुआ है. इसके अलावा 30 प्रतिशत आबादी 18 साल से कम उम्र की है जो कि टीकाकरण के योग्य नहीं है. इसके मायने हैं कि विभिन्न क्षेत्रों को खोलने के लिए अभी तक देश के पास उस तरह के सुरक्षा कवच नहीं हैं, जिसकी जरूरत है.’’

कोविड​​-19 के दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में आगाह करते हुए विषाणु विज्ञानी ने कहा कि लोग आमतौर पर इसके बारे में बात नहीं करते हैं ‘‘जो मुझे लगता है कि इसके प्रभाव के मामले में असाधारण होने जा रहा है.’’ लिपकिन ने चेताया कि कोरोना वायरस के कई और स्वरूप हो सकते हैं जिसका प्रसार हो रहा है.