SBI ने कहा, जब तक संभव होगा ब्याज दरें आसान बनाए रखेंगे

175
DCW issues notice to SBI

भारतीय स्टेट बैंक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को समर्थन देने के लिए ब्याज दरों को जितना संभव होगा नरम और अनुकूल बनाए रखेगा. एसबीआई के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने यह बात कही. पीटीआई की खबर के मुताबिक, कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर का बैंक की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों पर पड़ने वाले असर के बारे में एसबीआई चेयरमैन ने कहा कि यह लॉकडाउन पूरे भारत में नहीं लगा है. ऐसे में हमें बैंकिंग क्षेत्र पर इसके पड़ने वाले असर की कुछ समय प्रतीक्षा करनी होगी उसका आकलन करना होगा.

खबर के मुताबिक, उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति सहित कई चीजें हैं जिनका ब्याज दर पर असर होता है. हमारा प्रयास इकोनॉमिक ग्रोथ के प्रयासों को समर्थन देना है. यह सुनिश्चित करने के लिये जितना संभव हो सकेगा हम ब्याज दरों को नरम बनाये रखने का प्रयास करेंगे. खारा ने कहा कि स्थानीय प्रतिबंधों के आधार पर बैंकों के एनपीए परिदृय को लेकर इस समय किसी भी तरह का आकलन किया जाना जल्दबाजी होगी. उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में लाकडाउन की स्थिति अलग है, ऐसे में हमें अर्थव्यवस्था और एनपीए की स्थिति को लेकर कोई भी टिप्पणी करने से पहले कुछ और समय तक देखना और प्रतीक्षा करनी चाहिए.

कोरोना वायरस महामारी की मौजूदा परिस्थितियों के बीच बैंक की तरफ से किये जा रहे प्रयासों के बारे में खारा ने कहा कि बैंक ने देश के कुछ ज्यादा प्रभावित राज्यों में कोविड-19 मरीजों के लिए गहन चिकित्सा सुविधा (आईसीयू) वाले अस्थाई अस्पताल बनाने का फैसला किया है. बैंक ने इस काम के लिए 30 करोड़ रुपये की राशि रखी है और वह आपात स्तर पर चिकित्सा सुविधाए स्थापित करने को लेकर कुछ गैर-सरकारी संस्थानों और अस्पताल प्रबंधन के साथ संपर्क में है.

उन्होंने कहा कि बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिये एक हजार बिस्तरों की व्यवस्था करना चाहता है. इनमें 50 बिस्तर आईसीयू सुविधा के साथ होंगे. खारा ने कहा कि स्टेट बैंक ऑक्सीजन सिलेंडर और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अस्पतालों और एनजीओ के साथ गठबंधन कर रहा है. हमने एक कार्ययोजना तैयार की है. हमने 70 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है जिसमें कोविड-19 से जुड़े पहलों के लिए 17 सर्किलों में 21 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि बैंक के कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए बैंक ने देशभर में कुछ अस्पतालों के साथ समझौता किया है ताकि बीमार पड़ने वाले बैंक के कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज की सुविधा मिल सके. बैंक ने अपने कर्मचारियों और उनके आश्रितों के टीकाकरण का खर्च भी खुद उठाने का फैसला किया है. बैंक के कुल ढाई लाख कर्मचारियों में से अब तक 70 हजार कर्मचारियों का टीकाकरण हो चुका है.