रियाजुल्ला खान- उत्तर प्रदेश में बढ़ते महिलाओं के प्रति अपराध बनाम हिंदुत्व की राजनीति

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Riazullah Khan
Riazullah Khan

हाथरस कांड को लेकर समाजवादी लोहिया वाहिनी ज़िला अध्यक्ष रियाजुल्ला खान ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल पूछा- दरिंदगी के अलग अलग मामलों में किसी को ज्यादा भयानक बताना किसी को कम आखिर क्यों?

रियाजुल्ला बोले- इस आखिर क्यों का जवाब आवश्यक है खासकर दलित,पिछड़ा वर्ग,और अल्पसंख्यकों को इस सवाल के जवाब में प्रदेश सरकार की मंशा और मुखौटा दोनो नज़र आ जाएंगे।वर्तमान समाज की सोच को बिना पकड़े भविष्य के लिए योजना नही बनाई जा सकती, याद कीजिये दिल्ली की निर्भया,और आज हाथरस की निर्भया अंतर आपको दिखेगा की राजधानी दिल्ली में उपलब्ध सापेक्ष संवेदनशीलता हाथरस की निर्भया में भी जनाक्रोश वैसा ही था लेकिन एक गरीब दलित होने के कारण हाथरस से लेकर लखनऊ तक के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी उस बेटी के साथ हुए बलात्कार को झुठलाने के लिए बड़ी बेशर्मी से और असरदार तरीके से जुटे, इतना ही नही परिवार की बिना मर्ज़ी उस बेटी को रात के अंधेरे में तेल डाल कर जलाने का काम किया इन दो घटनाओं का अंतर उत्तरप्रदेश ही नही देश की धर्मांध, हिंदुत्ववादी सरकारों की सोच को दर्शाता है।लखीमपुर खीरी में भी पिछले दिनों 4 दलित बेटियों के साथ ऐसी ही घटनाएं हुई और पुलिसिंग और प्रशासन का रवैया लीपा पोती वाला ही रहा,अभी पसगवां थाने के मुड़िया चूड़ामणि की बिटिया तीन दिन से लापता थी उसकी लाश एक गन्ने के खेत से संदिग्ध अवस्था में बरामद हुई पोस्टमॉर्टम से लेकर अंत्येष्टि तक प्रशासन द्वारा परिवार पर दबाव बना कर लीपा पोती कर दी गयी यहां तक की शरीर पर चोट को भी पोस्टमॉर्टम में नज़रंदाज़ कर दिया गया।उत्तर प्रदेश की सरकार जिस तरह इन घटनाओं को दबा रही खाकी,खादी, और अपराधियों के गठबंधन से चल रही सरकार की पुलिस जब चित्रकूट में एक बेटी जो गैंग रेप का शिकार हुई अपराधियो से बचकर किसी प्रकार घर पहुंची जहां पुलिस मौजूद थी जिसने पीड़िता के बंधे हाथ खोले और सवाल किया तुम्हारे साथ ये सब किसने किया उनको जानती हो पीड़िता के न कहने पर पुलिस अधिकारी का ये कहना कि आरोपी जब पहचान लोगी तब एफआईआर लिखेंगे(पीड़िता की मां के बयान के आधार पर)इसके बाद वो बेटी आत्महत्या कर लेती है कौन जिम्मेदार वो रेपिस्ट या वो पुलिसवाला या सरकार। स्पष्ट है उत्तरप्रदेश की योगी सरकार की संवेदनहीनता नकारेपन की पराकाष्ठा है कि ऐसी घटनाओं की लीपा पोती की जा रही किसके इशारे पर?हाथरस में एक व्यक्ति पीड़िता के परिवार को सरेआम धमकी दे रहा! क्यों?

उन्होंने कहा- कई बार कोई बेटी अगर छेड़छाड़ की शिकायत करने थाना चौकी जाती है तो पुलिस उस बेटी को ही चरित्रहीन साबित करने लग जाती है, ठीक वैसे जैसे भाजपा के एक विधायक ये कह देते है कि ये लड़कियां गन्ने के खेत में ही क्यों मिलती है धान के खेत में क्यों नही?दलितों के प्रति पिछडो और अल्पसंख्यकों के प्रति हुए अपराधों पर एक वर्ग खुशी के साथ अपराधियों के पक्ष में क्यों खड़ा दिखाई देता है? पुरुष ही सर्वोच्च वाली सोच,महिला,दलित,पिछडो,अल्पसंख्यक सम्मान के काबिल नही मनुवादी सोच का परिणाम है ये सोच वाले लोग लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आते ही भारत के जिस संविधान को बाबा साहब ने दिया था जिसमे सामाजिक बराबरी, समान अधिकार, उस पर चोट की जाने लगी कि तुम दलित ,ओबीसी,अल्पसंख्यक,महिला हो तुम्हे बराबरी का अधिकार नही तुम्हारा शोषण करना उच्चवर्ग का अधिकार,ये मनुसंविधान के समर्थक अपने एजेंडे के तहत वो समाज में ,राजनीति में,या प्रशासन में जहां भी अपने एजेंडे को लागू करने का काम कर रहे,ये दलित, महिलाओं, पिछडो,अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक बना देना चाहते है साथ ही उन पर शोषण करने का अपना जन्मसिद्ध पुरुषार्थ समझते है,इनसे लड़ने के लिए बाबा साहब के संविधान और लोकतंत्र दोनो को बचाना ही नही अपितु इन मनुवादियों को सत्ता से बेदखल करने के लिए एकजुट होना पड़ेगा इसमे जितनी देर होगी स्थितियां उतनी बद से बदतर होती जाएगी।
संगठित रहो। सुरक्षित रहो।