रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुई डील पर दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई रोक, जानें क्या है पूरा मामला

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दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआरवीएल) व फ्यूचर ग्रुप के बीच पिछले वर्ष हुए सौदे पर रोक लगा दी है। अमेरिकी रिटेलिंग दिग्गज अमेजन इंक की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस जेआर मिधा ने किशोर बियानी नियंत्रित फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) से इस सौदे पर आगे कदम नहीं बढ़ाने को कहा है। कोर्ट ने माना कि फ्यूचर ग्रुप ने सिंगापुर के मध्यस्थता केंद्र के फैसले का जान-बूझकर उल्लंघन किया है। 

इसके साथ ही कोर्ट ने किशोर बियानी और फ्यूचर ग्रुप के अन्य निदेशकों की संपत्ति जब्त करने का आदेश देते हुए उन्हें 28 अप्रैल को अदालत में उपस्थित होने को कहा है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि सिंगापुर के आपात मध्यस्थ का फैसला नहीं मानने के जुर्म में क्यों नहीं तीन महीनों की सामान्य हिरासत में भेज दिया जाए। फ्यूचर ग्रुप और उसके निदेशकों को जुर्माने के तौर पर प्रधानमंत्री राहत कोष में 20 लाख रुपये जमा कराने को भी कहा गया है। इस राशि का उपयोग गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) की कैटेगरी में आने वाले वरिष्ठ नागरिकों को कोरोना का टीका लगाने में किया जाएगा।

फ्यूचर ग्रुप की शाखा एफआरएल ने आरआइएल की कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) के हाथों अपने अधिकांश कारोबार का सौदा 24,713 करोड़ रुपये में किया था। पिछले वर्ष अगस्त के आखिरी दिनों में यह सौदा होने के बाद अमेजन इंक इसे रोकने के लिए सिंगापुर स्थित आपात मध्यस्थता केंद्र पहुंच गई। उसका कहना था कि उसने वर्ष 2019 में फ्यूचर कूपंस में 49 फीसद हिस्सेदारी इस शर्त के साथ खरीदी है कि तीन वर्ष के बाद व 10 वर्ष से पहले उसे और हिस्सा खरीदने में प्राथमिकता मिलेगी। फ्यूचर कूपंस की एफआरएल में सात फीसद से कुछ अधिक हिस्सेदारी है। अमेजन के मुताबिक फ्यूचर ग्रुप ने रिलायंस के साथ सौदा कर उसके साथ हुए करार का उल्लंघन किया है।

मामले की सुनवाई के बाद सिंगापुर के आपात मध्यस्थता केंद्र ने अमेजन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सौदे पर रोक लगा दी। अमेजन ने इस फैसले का हवाला देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में सौदे पर रोक लगाने की याचिका दायर कर दी। वहां भी हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अमेजन के पक्ष में फैसला दिया और सौदे पर रोक लगा दी, जिसे फ्यूचर ग्रुप ने हाई कोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ का फैसला पलट दिया। इस दौरान भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ), शेयर बाजार नियामक सेबी और कई अन्य नियामक रिलायंस-फ्यूचर सौदे को अपनी मंजूरी दे चुके थे। 

इसी बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, जहां इस पर सुनवाई होनी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने नियामकों से कहा है कि वे सौदे की योग्यता पर विचार जारी रखें, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाएं।