लखनऊ के लोकल कास्टिंग डायरेक्टर मोहम्मद सैफ ने बताया, सैकड़ो के बीच ऐसे होता है कलाकारों का सेलेक्शन

    1981

    फिल्मों के बनने से पहले उसके कलाकारों का चयन करना भी एक अहम कार्य होता है। सही कलाकार चुनना बेहद जरूरी होता है क्योंकि वही है जो आगे जाकर फिल्म का चेहरा बनता है। बीते कुछ साल में इसी चयनकर्ता का चमकता चेहरा बनकर उभरे हैं लखनऊ के लोकल  कास्टिंग डायरेक्टर मोहम्मद सैफ जिन्होंने गुलाबो सीताबो, बाटला हाउस, गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल, चीट इंडिया, तनु वेड्स मनु, सत्यमेव जयते 2, मेहरुनिशा, लाहोर कॉन्फिडेंशियल,बग़ावत,और प्रणाम  जैसी फिल्मों के लिए लखनऊ के कलाकारों का चयन किया हैं ।  

    कास्टिंग हमेशा किसी भी फिल्म या शो का एक अहम हिस्सा होती है क्योंकि, दिन के अंत में कास्ट किये गए आर्टिस्ट स्क्रिप्ट में लिखे काल्पनिक किरदारों का चेहरा होते हैं, फिल्म कास्टिंग एक लम्बी प्रक्रिया होती है जो की अपने आप में ही एक कला है, इस नए युग की कास्टिंग प्रक्रिया में लखनऊ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे – मोहद सैफ

    बीते कुछ सालो से उत्तर प्रदेश में शूटिंग का प्रचलन जोरो पर है, बड़ी फिल्मों की शूटिंग के लिए तमाम लोकल आर्टिस्ट की जरुरत पड़ती है, लखनऊ में फिल्म शूटिंग के लिए लोकल आर्टिस्ट की व्यवस्था करना, मोहम्मद सैफ की जिम्मेदारी होती है, आर्टिस्ट को-ऑर्डिनेशन में अब लखनऊ में सबसे पहले मोहम्मद सैफ का नाम लिया जाता है, शहर में कोई भी निर्माता फिल्म शूटिंग के लिए आता है तो ज़्यादातर सबसे पहले सैफ से ही मिलना पसंद करता है, क्योंकी फिल्म में भले ही लीड कलाकार मुंबई से हो लेकिन लोकल लेवल पर सैकड़ो कलाकारों की जरुरत होती है।  

    कास्टिंग डायरेक्टर मोहम्मद सैफ ने BHN न्यूज़ से खास बातचीत की और उन्होंने कई सारी बातें शेयर की..उन्होंने कहां की अभी भी लखनऊ में कुछ लोगो को ये नहीं पता है की ऑडिशन कैसे देना चाहिए, वे प्रक्रिया समझ नहीं पाते है और रिजेक्शन मिलने पर निराश हो जाते है, ऑडिशन प्रक्रिया के बारे में बताते हुए वे कहते है कि लेखक द्वारा लिखे गए किरदारो के लिए ऑडिशन किये जाते और जो  उस किरदार के ऊपर फिट बैठता है उससे ही सेलेक्ट किया जाता है।  मैं सबसे पहले तो कलाकार की सच्चाई देखता हूं कि वह किस तरह के संस्कारों के साथ आया है, कहां से आया है और किस जगह का है फिर आखिरी पड़ाव उसकी निष्ठा होती है। कितनी निष्ठा, धैर्य और मन लगाकर वह ऑडीशन देते हैं और आगे काम करते हैं। चयन करने से पहले इन्हीं सब चीजों पर गौर करता हूं।

    सैफ आगे बात करते हुए बताते है की मै अपनी बड़ाई नहीं करूंगा पर इतना कहूंगा कि मै बहुत भाग्यशाली रहा हूं। सभी से बहुत प्यार भी मिला। लखनऊ में नए कलाकारों को लाने और उन उम्दा कलाकारों के कारण ही आज मुझे इतनी इज्जत मिल रही है। जिन-जिन का चयन मैंने किया है आज वे अच्छा काम कर रहे है  हैं। मुझे बहुत खुशी होती है क्योंकि मैं उनकी सफलता में एक छोटा सा हिस्सा हूं लेकिन असली कार्य उन्हीं का है। 

    सैफ आगे कहते है कि- ऑडिशन देने के लिए स्क्रिप्ट को समझना और किरदार को पूर्ण रूप से जीना बहुत जरुरी है।

    मोहम्मद सैफ कहते है की- एक कास्टिंग डायरेक्टर की पहचान तब होती है जब उसके साथ अच्छे एक्टर्स जुड़े हो, अपने करियर के सफर की बात करते हुए सैफ कहते है कि उन्होंने अपने करियर कि शुरआत मॉडलिंग से की, रंगमंच में प्रतिभा दिखाने के बाद उन्होंने ने अपनी पहली फिल्म की शुरुवात  “शुद्र: द राइज़िंग” से किया बाद में उन्होंने बुलेट राजा, शोरगुल जैसी कई फिल्मो में काम किया और वो सफल भी हुए हैं। साथ ही साथ उन्होंने बड़ी फिल्मे और शार्ट फिल्मों में काम किया, पर सिर्फ फिल्मो में रोल प्ले करने से वे सेट पर ज्यादा वक़्त नहीं गुज़र पाते थे जिसके चलते उन्होंने कास्टिंग डायरेक्शन की राह चुनी।