संघर्ष से सफलता तक लखनऊ के मशहूर कलाकार संदीप यादव की कहानी

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Sandeep Yadav

लखनऊ शहर से निकलना और मुंबई जैसे महानगर में अपना मुकाम बनाना आसान बात नहीं है. आज हमारे बीच ऐसे ही फिल्म जगत के एक बेहतरीन कलाकार संदीप यादव जी हमारे साथ है जिन्होंने गुलाबो सिताबो,बाटला हाउस और सत्यमेव जयते जैसी बड़ी धमाकेदार फिल्मो में दिग्गज कलाकारों के साथ अपना शानदार अभिनय बिखेरा है. फिल्मो के अलावा छोटे परदे पर भी इन्होने अपने अभिनय का जादू चलाया है. आज हम जानेंगे लखनऊ के मशहूर एक्टर संदीप यादव के फ़िल्मी करियर और स्ट्रगल के बारे में और कैसा रहा अब तक का उनका सफ़र.

प्रश्न.1लखनऊ से निकल कर मुंबई जैसे बड़े शहर में अपना मुकाम बनाना, फिल्मो में अपनी अलग पहचान बनाना कैसा रहा और यहाँ तक के सफ़र के बारे में भी बताये?

उत्तर.1– मेरी पैदाइश लखनऊ की है. मेरे परिवार से कोई भी फिल्म इंडस्ट्री में नहीं आया है. तो आप को अंदाज़ा होगा कि मेरा जीवन संघर्ष भरा रहा होगा. जब मैं छोटा था और रामलीला में एक्टिंग करता था तो लोग मुझे नाचने वाला और नौटंकी करने वाला बुलाते थे. वे एक्टिंग को एक पेशे की तरह नहीं देखते थे. उनको एक्टिंग काम नहीं कामचोरी लगती थी. लेकिन में वहां से निकला और अपने लिए एक सफल रास्ता बनाया .

मैंने अपनी एक्टिंग की पढाई भी यही लखनऊ के भारतेंदु नाट्य अकादमी से की. मैंने यहाँ कई एक्टिंग workshops किये और आगे चलकर कई नाटक भी किये. फिर जब लगा की मुंबई जाना चाहिए तो वहां भी गए और शुरुआत में तो काम मिलने की दिक्कत हुई. पर धीरे-धीरे छोटे परदे से होते हुए बड़े परदे पर जाने का भी मौका मिला और बड़े कलाकारों के साथ काम करने का भी मौका मिला. अपने एक्टिंग करियर के शुरुआत में छोटे-बड़े सीरियल भी किये और फिर यह कारवां आगे बढ़ता रहा और मुझे जॉन अब्राहम के साथ ‘बाटला हाउस’ और ‘सत्यमेव जयते’ और अमिताभ बच्चन के साथ ‘गुलाबो सिताबो’ में काम करने का मौका मिला.

प्रश्न.2फिल्मो में आने की प्रेरणा कहाँ से मिली और कब लगा आपको की अभिनय के छेत्र में आपको अपनी किस्मत आजमानी चाहिए ?

उत्तर.2– यह बड़ी दिलचस्प कहानी है और साथ ही साथ शर्म वाली भी. असल में मैं 12वी में मैं फ़ैल हो गया था और उससे भी ख़राब बात यह है की मुझे मैथ्स में 1, फिजिक्स में 12 और केमिस्ट्री में 13 नंबर मिले. आज मैं जो भी हूँ वह मेरी असफलताओं के कारण हूँ. अगर मैं असफल न हुआ होता तो मुझे यह लड़ने की ताकत न मिलती. मैंने कक्षा 7 में रामलीला की थी और मुझे वह करने में मज़ा आया था और मैं आगे यही करना चाहता था.मैंने अपना सारा ध्यान एक्टिंग की तरफ लगा दिया और BNA में थिएटर वर्कशॉप करने लगा. बाद में जब यहाँ काम में उतना पैसा नहीं था तो काम करने और पैसे कमाने मुंबई आ गए.

प्रश्न.3देश में दूसरी फिल्म सिटी नोएडा में बन रही है ,उत्तर प्रदेश सरकार के इस बड़े फैसले को कैसे देखते है और अगर नोएडा नहीं तो कहाँ बने फिल्म सिटी?

उत्तर.3– मैं पहले उत्तर प्रदेश सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूँ जो वह फिल्म सिटी का निर्माण कर रहे है. परन्तु यह फिल्म सिटी जो नयी बनने वाली है व लखनऊ में बने न कि नोएडा में. नोएडा में पहले से ही एक फिल्म सिटी है. वो कलाकार जो फिल्मो में काम करना चाहते है अगर घर से नज़दीक रहे वही बेहतर है. लखनऊ में ही ज़्यादातर फिल्मो की शूटिंग होती है और वहां पर वेंडर्स,क्राउड मैनेजमेंट इत्यादि चीज़े उपलब्ध है.

प्रश्न.4जब आप फिल्मो में आये तब से लेकर अबतक फिल्म इंडस्ट्री में किस तरह का बदलाव आप देखते है, अगर कम्पटीशन की बात करे तो आज के समय में कैसा है कम या ज़्यादा?

उत्तर.4 – अब कलाकार अपने आप को फिट ज़्यादा रखते है. बॉडी पर ध्यान देते है, gym जाते है, खान-पान का ध्यान रखते है. पहले फोटो कल्चर था. पहले काम मांगने के लिए हर निर्माता के पास फोटो लेकर जाना पड़ता था,अब ऑनलाइन ही काम हो जाता है. पहले रोल हमेशा लेखक एक्टर को देखकर ही किरदार लिखते थे और अब, किरदार आम इंसान जैसा होता है.जिसको हम जैसे कलाकार निभा पाते है.

प्रश्न.5आज के उभरते हुए कलाकारों खासकर के छोटे शहर से आते है उनके लिए आप क्या बोलना चाहेंगे?

उत्तर.5– युवाओं को यही सलाह है की ‘there is no formula.’ एक्टिंग कोई पेट से सीख के नहीं आता. कला को सीखना पड़ता है और कभी कभी तो पूरी ज़िन्दगी लग जाती है.जब मैंने अमिताभ बच्चन के साथ ‘गुलाबो सिताबो’ में काम किया तब मैंने यह देखा की इतना काम कर चुके अभिनेता भी कितने अलर्ट रहते है और बहुत रेहेर्सल करते है. अमिताभ जी के अन्दर अपने काम के प्रति एक मासूमियत है.

प्रश्न.6अभी तक आपने कई शानदार किरदार निभाय उनमे से आपका सबसे पसंदीदा किरदार कौन सा रहा और क्यों?

उत्तर.6 – मेरे जीवन में एक phase ऐसा भी आया जब मैं इतना निराश हो गया था की सब कुछ त्याग कर अपने घर वापस जाना चाहता था. तब मुझे बाटला हाउस में एक किरदार मिला. जिसने मेरी आगे की मुश्किलों को काफी आसान किया. उस फिल्म मैं मुझे जॉन अब्राहम और निखिल अडवाणी जी ने काफी सराहा और आगे काम करने की प्रेरणा दी. इसीलिए वह मेरा यादगार किरदार रहेगा.

प्रश्न.7आने वाले वक्त में दर्शक आपको किन नए किरदारों में देखेंगे और कौन-कौन से आपके प्रोजेक्ट्स है जिनपर आप काम कर रहे है?

उत्तर.7– आने सवाले समय में मेरे कई प्रोजेक्ट्स चल रहे और कई चलेंगे कुछ प्रोजेक्ट्स का नाम लेना हो तो अभी तो मैं ‘आश्रम’ नाम की वेब सीरीज कर रहा हूँ जो की प्रकाश झा द्वारा निर्देशित है. इसके अलावे अनुभव सिन्हा की ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है’, द कन्वर्शन और कांस फिल्म फेस्टिवल में गयी मूवी ‘उलझन’ भी है जो आने वाल़े समय में परदे पर दिखेंगी.