जीवन बीमा कंपनी LIC के आईपीओ को लेकर बड़ी खबर, कंपनी ने नए सिरे से SEBI के सामने DRHP जमा किया

181
LIC
LIC

लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन की तरफ से एलआईसी आईपीओ को लेकर मार्केट रेग्युलेटर सेबी के सामने नए सिरे से DRHP जमा किया गया है. सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एलआईसी ने दिसंबर तिमाही के नतीजे आधार पर नए सिरे से डीआरएचपी जमा किया है. पुराने DRHP को जो मंजूरी मिली थी उसके मुताबिक, 12 मई तक एलआईसी आईपीओ ला सकती है. उसके बाद नए सिरे से सेबी के सामने दस्तावेज जमा करने की जरूरत होगी. 13 फरवरी को एलआईसी आईपीओ के लिए DRHP जमा किया गया था. इस समय शेयर बाजार में भारी उठा-पटक है. ऐसे में सरकार इंतजार करना चाहती है जिससे आईपीओ को बंपर सफलता मिले. इस मामले में सरकार किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है.

दिसंबर तिमाही में लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन के प्रदर्शन पर गौर करें तो कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर 234.9 करोड़ पर पहुंच गया है. दिसंबर 2020 में कंपनी का नेट प्रॉफिट महज 90 लाख रहा था. फर्स्ट ईयर प्रीमियम बढ़कर 8748.55 करोड़ रुपए पर पहुंच गया जो दिसंबर 2020 तिमाही में 7957.37 करोड़ रुपए था. रिन्यूअल प्रीमियम बढ़कर 56822 करोड़ रुपए पर पहुंच गया. दिसंबर तिमाही में टोटल प्रीमियम 97761 करोड़ रुपए रहा जो एक साल पहले 97008 करोड़ रुपए था.

जानिए रिजर्व बैंक ने इस आईपीओ को लेकर क्या कहा
इधर एलआईसी आईपीओ को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा. ऐसे में इसे सही समय पर लाना बहुत जरूरी है. आरबीआई ने कहा कि इस आईपीओ के लिए करेक्ट टाइमिंग जरूरी है. इसके अलावा रिटेल निवेशकों के लिए 35 फीसदी का आरक्षण दिया गया है. ऐसे में रिटेल सेगमेंट का रिस्पॉन्स बहुत जरूरी है.

रिटेल निवेशकों का प्रदर्शन बहुत जरूरी है
रिजर्व बैंक ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में रिटेल निवेशकों का स्टॉक मार्केट में पार्टिसिपेशन काफी बढ़ा है. 1 अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 के बीच कुल 289 लाख यानी 2.89 करोड़ नए डिमैट अकाउंट खोले गए हैं. एलआईसी ने अपने पॉलिसी होल्डर्स के लिए इस आईपीओ में विशेष सुविधा दी है. कंपनी का सब्सक्राइबर्स बेस बहुत बड़ा है. ऐसे में रिटेल निवेशकों का पार्टिसिपेशन बहुत ज्यादा मायने रखता है. ऐसे सरकार से ट्रस्ट बनाए रखने की भी अपील की गई है.

यूक्रेन क्राइसिस से आईपीओ पर काले बादल
सरकार ने पहले एलआईसी के लगभग 31.6 करोड़ शेयरों या 5 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए मार्च में आईपीओ लाने की योजना बनाई थी. इस आईपीओ से करीब 60,000 करोड़ रुपए जुटाने की उम्मीद थी. हालांकि, रूस-यूक्रेन संकट (Russia Ukraince Crisis) के बाद शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए आईपीओ की योजना पटरी से उतर गई है.