किसान आंदोलन: महापंचायत के लिए मुजफ्फरनगर में युद्ध स्तर पर चल रही तैयारी

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मुजफ्फरनगर में मोरना क्षेत्र के गांव जड़वड़ कटिया में जय किसान आंदोलन की किसान पंचायत में मुख्य अतिथि योगेंद्र यादव ने कहा कि यह समय नस्ल और फसल बचाने का है। किसान अपने हक की आवाज को बुलंद करें। उन्होंने पांच सितंबर की किसान महापंचायत को सफल बनाने का आह्वान किया।

योगेंद्र यादव ने कहा कि किसान आंदोलन को नौ माह हो गए हैं। सरकार के पेट में बहुत दर्द है। आंदोलन में कुछ ऐसा पैदा हुआ है कि 75 साल में किसान पहली बार जगाने से किसान में आत्म सम्मान जाग्रत हो चुका है। इस मौके पर बुजुर्ग किसानों ने मुख्य अतिथि को पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर को राजनीतिक रोटी सेकने के लिए जलाया गया था, हमें मुजफ्फरनगर को दोबारा जोडे़ंगे, जिसकी गवाह पांच सितंबर की महापंचायत बनेगी। जिसमें भाग लेने के लिये देश के किसान चल पड़े हैं।

मनीष भारती ने कहा कि सामाजिक आधार की जानकारी ही आंदोलन को विश्व का सिरमौर बना देती है। प्रदेश अध्यक्ष मानवेंद्र वर्मा ने कहा कि लाभ हानि को न देखे, यह किसान के हकों की लड़ाई है। पश्चिम बंगाल से आए राष्ट्रीय अध्यक्ष अविक शाह ने कहा कि कंपनी राज व किसान की आमने-सामने की लड़ाई है। संचालन पुष्पेंद्र कुमार और अध्यक्षता रामपाल सिंह ने की। मौके पर कर्नल जयवीर सिंह, अशोक पंवार, अभिषेक चौधरी, ओपी छोटन आदि ने विचार रखे। आयोजन में अंकुल भाटी, बृजपाल जिला अध्यक्ष, कुलदीप, शिवकुमार, दीपक आदि का सहयोग रहा।

भाकियू की महापंचायत में पहली बार महिलाएं भी ताकत में रूप में दिखाई देगी। पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में महिलाओं के पहुंचने की संभावना है। भाकियू सूत्रों के अनुसार बाहरी राज्यों से आने वाले किसान चार सितंबर में बड़ी संख्या में जनपद में पहुंच जाएंगे। 

भारतीय किसान यूनियन की पांच सितंबर की पंचायत को लेकर युद्ध स्तर पर तैयारी चल रही है। भाकियू और रालोद कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर महापंचायत में पहुंचने की अपील कर रहे हैं। महापंचायत में पहली बार महिलाओं की बड़ी संख्या देखने को मिलेगी। भाकियू सूत्रों की माने तो पंजाब और हरियाणा से महिलाओं के बड़े जत्थे पंचायत में पहुंच रहे हैं। पंचायत के जरिये महिला किसान भी अपनी ताकत दिखाएंगी।

भाकियू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों से आने वाले किसान चार सितंबर तो मुजफ्फरनगर पहुंचना शुरू हो जाएंगे। जिले के गुरुद्वारों में ही 50 हजार किसानों के रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कई जगह खुले लंबर रहेंगे। किसानों को भोजन की कोई समस्या नहीं रहेगी। भाकियू की महापंचायत में पहली बार ऐसा दिखाई देगा कि महिला किसान भी अच्छी संख्या में हैं।

देशवाल खाप के छोटे चौधरी शरणवीर सिंह ने कहा कि किसान महापंचायत में खाप के लोग अधिक से अधिक संख्या में शामिल होंगे। तीनों कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहा है। इसी से संबंधित किसान समस्याओं को महापंचायत में उठाया जाएगा। देशवाल खाप किसानों की समस्याओं को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के साथ है। महापंचायत में भाग लेने के लिए देशवाल खाप के गांवों में जनसंपर्क कर किसानों को कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा रहा है।