चीन ने अरुणांचल प्रदेश के एक लड़के का किया अपहरण, सांसद तापिर गाओ ने जानकारी दी

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चीन ने अरुणाचल प्रदेश के एक 17 वर्षीय लड़के का अपहरण कर लिया है. राज्य के एक सांसद तापिर गाओ ने बुधवार को इस बारे में जानकारी दी. वहीं, कांग्रेस नेता और वायनाड सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा है, ‘प्रधानमंत्री की बुजदिल चुप्पी ही उनका बयान है.’ साथ ही कांग्रेस नेता ने कहा है कि वह अगवा हुए किशोर के परिवार के साथ खड़े हैं.

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘गणतंत्र दिवस से कुछ दिन पहले भारत के एक भाग्य विधाता का चीन ने अपहरण किया है, हम मिराम तरोन के परिवार के साथ हैं और उम्मीद नहीं छोड़ेंगे, हार नहीं मानेंगे. PM की बुजदिल चुप्पी ही उनका बयान है- उन्हें फर्क नहीं पड़ता!’ कांग्रेस नेता भारत की चीन के साथ जारी सीमा विवाद को लेकर मोदी सरकार पर हमेशा से ही हमलावर रहे हैं. भारत और चीन के बीच सीमा पर लगभग 20 महीने से तनाव बना हुआ है.

गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश से सांसद तापिर गाओ ने बुधवार को कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने राज्य में भारतीय क्षेत्र के अपर सियांग जिले से 17 वर्षीय एक किशोर का अपहरण कर लिया है. गाओ ने कहा कि अपहृत किशोर की पहचान मिराम तरोन के रूप में हुई है. उन्होंने कहा कि चीनी सेना ने सियुंगला क्षेत्र के लुंगता जोर इलाके से किशोर का अपहरण किया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सांसद ने लोअर सुबनसिरी जिले के जिला मुख्यालय जिरो से कहा कि PLA से बचकर भागने में कामयाब रहे तरोन के मित्र जॉनी यइयिंग ने स्थानीय अधिकारियों को अपहरण के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि दोनों किशोर जिडो गांव के रहने वाले हैं. सांसद ने कहा कि यह घटना उस स्थान के पास हुई, जहां शियांग नदी अरुणाचल प्रदेश में भारत में प्रवेश करती है.

इससे पहले गाओ ने ट्वीट कर मंगलवार को किशोर के अपहरण के बारे में जानकारी साझा की. उन्होंने ट्वीट के साथ अपहृत किशोर की तस्वीर साझा की और कहा, ‘भारत सरकार की सभी एजेंसियों से किशोर की जल्द रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध है.’ गाओ ने यह भी कहा कि उन्होंने इस घटना के बारे में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक को सूचित किया है.

इससे पहले, सितंबर 2020 में PLA ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले से पांच युवकों का अपहरण किया था और करीब एक हफ्ते बाद उन्हें रिहा किया था. ये मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब भारतीय सेना और PLA के बीच अप्रैल 2020 से पूर्वी लद्दाख में तनाव जारी है. भारत लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक चीन के साथ 3,400 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा साझा करता है.