सात माह बाद कोवाक्सिन का उत्पादन हुआ तेज, अब महीने भर में एक करोड़ खुराक होगीं तैयार : स्वास्थ्य मंत्री 

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सात महीने बाद देश में कोवाक्सिन की कमी दूर करने के लिए उत्पादन तेज हो चुका है। रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने गुजरात के अंकलेश्वर में भारत बायोटेक कंपनी के नए प्लांट पर पहुंच टीके की पहली वाणिज्यिक खेप को रवाना किया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीके की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने से टीकाकरण की गति में भी बढ़ोतरी होगी।

भारत बायोटेक और ज़ायडस कैडिला दोनों कंपनियों के टीके का अनुसंधान और उत्पादन भारत में हुआ। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अंकलेश्वर संयंत्र से हर महीने एक-एक करोड़ खुराक का उत्पादन होना शुरू हो चुका है। भारत बायोटेक ने पहले ही अपने हैदराबाद, मलूर, बंगलूरू और पुणे स्थित प्लांट पर भी काम शुरू कर दिया है।

अब भी 90 फीसदी तक कोविशील्ड का ही इस्तेमाल
दरअसल 16 जनवरी से देश में कोरोना टीकाकरण कार्यक्त्रस्म चल रहा है। अब तक 63 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को वैक्सीन लग चुकी है जिनमें से केवल कोवाक्सिन की बात करें तो यह महज 7.65 करोड़ है। जबकि हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी टीका आने से पहले कई दावे कर रही थी और टीकाकरण शुरू होने के लंबे समय बाद भी कंपनी की आपूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

स्थिति यह है कि देश में अभी भी सबसे ज्यादा 90 फीसदी तक कोविशील्ड का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। यह हालात तब हैं जब टीका उत्पादन बढ़ाने के लिए भारत सरकार भी फॉर्मा कंपनियों की आर्थिक व अन्य स्तर पर मदद कर चुकी है। इस बार भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ कृष्णा एला ने फिर से नए आंकड़े रखते हुए एक अरब वैक्सीन का उत्पादन साल भर में करने का लक्ष्य पूरा करने का दावा किया है।