दिल्ली कैबिनेट ने पास किया दूसरा प्रस्‍ताव, केंद्र की मंजूरी मिली तो विधायकों की सैलरी होगी दोगुनी

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arvind kejriwal

केंद्र सरकार द्वारा दिल्‍ली के विधायकों के वेतन बढ़ाने के प्रस्‍ताव को खारिज करने के बाद अरविंद केजरीवाल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, दिल्ली कैबिनेट ने विधायकों के वेतन-भत्ता बढ़ोतरी के दूसरे प्रस्ताव को मंजूरी दी. दिल्ली कैबिनेट के प्रस्ताव के मुताबिक, अब दिल्ली के विधायकों को 30,000 रुपये/महीना वेतन मिलेगा. जबकि अभी दिल्ली के विधायकों को प्रति महीने 12,000 रुपये वेतन मिलता है.

यही नहीं, आज यानी मंगलवार को दिल्ली कैबिनेट द्वारा पास किए गए प्रस्ताव में विधायकों को वेतन और अन्य भत्तों को मिलाकर कुल 90,000 रुपये प्रति महीना मिलेंगे. जबकि वर्तमान में विधायकों का वेतन-भत्ता मिलाकर 54,000 रुपये प्रति महीना मिलते हैं. इससे पहले अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिसंबर 2015 में दिल्ली विधानसभा में विधायकों का मासिक वेतन बढ़ाकर 2.10 लाख रुपये करने के बाबत एक विधेयक पारित कराया था, जिसे केंद्र सरकार ने सोमवार को खारिज कर दिया है. सूत्रों के मुताबि‍क, केजरीवाल सरकार द्वारा विधायकों का मासिक वेतन बढ़ाने के विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पहले संबंधित अधिकारियों की अनुमति नहीं ली गई थी.

बता दें कि 2011 के बाद यानी दस साल से दिल्ली के विधायकों के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. वहीं, दिल्ली कैबिनेट द्वारा पास किया गया नया प्रस्ताव अब केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और केंद्र की मंजूरी के बाद दिल्ली सरकार दोबारा दिल्ली विधानसभा में बिल लेकर आएगी.

दिल्ली कैबिनेट की बैठक में पास हुआ विधायकों का नया प्रस्तावित वेतन-भत्ता कुछ इस प्रकार होगा.
1. बेसिक वेतन- 30,000 रुपये
2. चुनाव क्षेत्र भत्ता- 25,000 रुपये
3. सचिवालय भत्ता- 15,000 रुपये
4.  वाहन भत्ता- 10,000 रुपये
5.  टेलीफोन- 10,000 रुपये
कुल- 90,000 रुपये

वहीं, दिल्ली सरकार के सूत्रों का कहना है कि दिल्ली अभी भी उन राज्यों में से एक है, जो अपने विधायकों को सबसे कम वेतन और भत्ते देता है. कई भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियों द्वारा शासित राज्य अपने विधायकों को बहुत अधिक वेतन प्रदान करते हैं, जबकि दिल्ली में रहने का खर्च भारत के अधिकांश हिस्सों की तुलना में बहुत अधिक है. इसके अलावा, कई राज्य अपने विधायकों को कई अन्य सुविधाएं और भत्ते प्रदान करते हैं, जो दिल्ली सरकार नहीं प्रदान करती है. जैसे- हाउस किराया भत्ता, कार्यालय किराया और कर्मचारियों के खर्च, कार्यालय उपकरणों को खरीदने के लिए भत्ता, उपयोग के लिए वाहन, चालक भत्ता आदि प्रदान नहीं करती है.