Air Pollution कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने अपनाया ये नायाब तरीका, एंटी-स्मॉग गन 5000 लीटर की क्षमता वाला पानी का टैंक

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दिल्ली में वायु प्रदूषण के खिलाफ जंग अब तेज हो गई है. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने वुधवार को वायु की गुणवत्ता में सुधार और धूल प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक एंटी-स्मॉग गन का उद्घाटन किया. केजरीवाल ने दावा किया कि ट्रक आधारित यह एंटी-स्मॉग गन शहर में धूल प्रदूषण को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. ट्रक में बीएस-6 इंजन लगा है. एंटी-स्मॉग गन में 5000 लीटर की क्षमता वाला पानी का टैंक है और यह लगातार 3-4 घंटे काम करता रहेगा. दिल्ली सरकार के ‘युद्ध, प्रदुषण के विरुद्ध’ अभियान के तहत राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 23 एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं, ताकि धूल प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके.

दिल्ली सरकार ने ये एंटी स्मॉग गन को बीएस-6 इंजन वाले ट्रकों पर लगाया है और इस इंजन से बहुत कम प्रदूषण होगा, जो वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. एंटी-स्मॉग गन में 5000 लीटर की क्षमता वाला पानी का टैंक है और यह लगातार 3-4 घंटे काम करता रहेगा. 5000 लीटर का पानी की टैंक सड़क, फुटपाथ और पटरी के बीच और किनारों पर स्थित पेड़ों को धो सकता है, क्योंकि इस एंटी स्मॉग गन में पानी को फब्वारे में तब्दील करने और हवा से पार्टिक्यूलेट मेटर को खत्म करने की सुविधा है.

दिल्ली में धूल प्रदूषण से निपटने के लिए पीडब्ल्यूडी की ओर से प्रमुख चैराहों और निर्माण स्थलों पर लगभग 23 एंटी-स्मॉग गन लगाए गए हैं. धूल प्रदूषण से निपटने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने पेड़ों, सड़कों और निर्माण स्थलों पर पानी छिड़कने की जिम्मेदारी भी ली है. केजरीवाल के निर्देश पर अधिकारियों की ओर से आवश्यकता पड़ने पर एंटी-स्मॉग गन और पानी के टैंकरों की संख्या में वृद्धि की जाएगी.

गौरतलब है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर से विकराल रूप धारण कर लिया है. दिल्ली में वायु की गुणवत्ता बेहद खतरनाक स्‍तर पर पहुंच गई है. दिल्ली का एयर क्‍वालिटी से यहां रह रहे लोगों को सांस लेने में दिक्‍कतें हो रही हैं. इतना ही नहीं दिल्‍ली में बढ़ते कोरोना मरीजों की मौत के लिए भी प्रदूषण ही एक बड़ी वजह बताया जा रहा है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक पिछले कई दिनों से दिल्‍ली में पीएम 2.5 का स्तर 350 के पार रह रहा है. वहीं दिल्ली सरकार के मुताबिक नवंबर के आखिरी और दिसंबर के शुरुआती सप्ताह में कोरोना के मामले में आई तेजी के पीछे प्रदूषण एक बड़ी वजह है. सर्दी बढ़ने से एक बार फिर से प्रदूषण के स्तर में हुई बढ़ोतरी से लोगों की परेशानियां और बढ़ने की आशंका है.