CM नीतीश कुमार बोले- जाति आधारित जनगणना कम से कम एक बार जरूर करवानी चाहिए

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बिहार में बीजेपी के सहयोग से सरकार चला रहे मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्‍य में जाति आधारित जनगणना करवाने के पक्ष में बड़ा बयान दिया है. बिहार के मुख्यमंत्री नी​तीश कुमार ने कहा, एक बार जाति आधारित जनगणना जरूर होनी चाहिए, ये सबके हित में है. इससे SC/ST के अलावा जो दूसरे गरीब तबके के लोग हैं, उनको भी लाभ मिलेगा.

सीएम नीतीश कुमार ने आज शनिवार को कहा, हमने पहले ही फरवरी 2019 और 2020 में जाति-आधारित जनगणना के बारे में अपने विचार पहले ही सदन में रखा था. जाति आधारित जनगणना कम से कम एक बार जरूर करवानी चाहिए. इसके जरिए उन्हें योजनाओं का लाभ मिल सकता है. अगर हम सही संख्या जानते हैं, तो हम उनकी बेहतरी की दिशा में काम कर सकते हैं.

नीतीश कुमार के धुर विरोधी और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद भी इस मुद्दे पर जदयू के विचार से सहमत है. हालांकि, जदयू का इस मुद्दे पर रुख केंद्र और राज्य में सहयोगी बीजेपी के साथ एक और वैचारिक मतभेद का इशारा करता है. बीजेपी को बड़ी संख्या में अगड़ी जातियों का समर्थन मिलता है.

जदयू के ससंदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने न्यायपालिका में भी आरक्षण की मांग की थी
बता दें कि बीते दिनों केंद्र द्वारा संसद में ‘केवल अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों’ की गणना का प्रस्ताव होने सबंधी जानकारी देने के एक दिन बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने 21 जुलाई को उसी तर्ज पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की आबादी की भी गणना कराने की मांग की थी. इस संबंध में जदयू के ससंदीय बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की ओर से बयान जारी किया था. उन्होंने न्यायपालिका में भी आरक्षण की मांग की थी.

यह जरूरी है कि ओबीसी की सही आबादी की जानकारी हो
जदयू के ससंदीय बोर्ड के अध्यक्ष कुशवाहा ने कहा था, यह जरूरी है कि ओबीसी की सही आबादी की जानकारी हो. यहां तक कि उच्चतम न्यायालय ने ऐसी राय रखी है. पूर्व में की गयी इस तरह की गणना की रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए. इसके साथ ही जातिगत आधार पर नियमित जनगणना की जानी चाहिए.” कुशवाहा एक दिन पहले केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय द्वारा एससी/एसटी की गणना संबंधी लोकसभा में दि गए बयान पर पूछे सवालों का जवाब दे रहे थे.