Nepal और USA की 50 करोड़ डॉलर की डील में दुश्मन बना चीन, बोला- सहायता बिना किसी राजनीतिक बंधन के होनी चाहिए

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    Nepal-USA
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    अमेरिका और नेपाल ने पांच साल पहले मिलेनियम कॉरपोरेशन चैलेंज समझौता किया था. जिसके तहत नेपाल को अपने विकास के लिए अमेरिका से 50 करोड़ डॉलर मिलेंगे. लेकिन वो चीन के दबाव में आकर इस समझौते को अंतिम मंजूरी नहीं दे रहा है. इस बीच चीन ने शुक्रवार को कहा कि वह ‘जबरदस्ती की कूटनीति’ और संप्रभुता की कीमत पर सहायता के खिलाफ है. उसने ये बात तब कही है, जब हाल ही में अमेरिका की तरफ से नेपाल 28 फरवरी की डेडलाइन देते हुए कहा गया था कि ‘बाहरी प्रभाव और भ्रष्टाचार’ के कारण इसे मंजूरी नहीं दी जा रही है.

    अमेरिका-वित्त पोषित मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) समझौते का समर्थन करने के लिए नेपाल के सत्तारूढ़ गठबंधन की बैठक शुक्रवार को दूसरे दिन बेनतीजा रही. नेपाल के राजनीतिक दलों में इसे लेकर मतभेद के बीच कि अमेरिकी बुनियादी ढांचा सहायता कार्यक्रम को स्वीकार करना चाहिए या नहीं, चीन काठमांडू में जारी राजनीतिक बहस में कूद गया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि बीजिंग नेपाल को अंतरराष्ट्रीय सहायता देखकर ‘प्रसन्न’ है, लेकिन यह सहायता बिना किसी राजनीतिक बंधन के होनी चाहिए.

    वांग ने कहा, ‘इस तरह का सहयोग नेपाली लोगों की इच्छा के पूर्ण सम्मान पर आधारित होना चाहिए और इसमें कोई राजनीतिक बंधन नहीं होना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘हम जबरदस्ती की कूटनीति और दूसरे देशों की संप्रभुता की कीमत पर स्वार्थी हितों पर आधारित एजेंडे का विरोध करते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘नेपाल के मित्र एवं करीबी पड़ोसी और विकास भागीदार के रूप में, चीन हमेशा की तरह, नेपाली लोगों को स्वतंत्र रूप से अपना विकास पथ चुनने में समर्थन करेगा. साथ ही नेपाल को उसके राष्ट्रीय हितों और लोगों की इच्छा को ध्यान में रखते हुए सही विकल्प चुनने में समर्थन करेगा.’

    पिछले हफ्ते, अमेरिका ने नेपाल से कहा था कि वह एमसीसी के तहत अमेरिका से प्रस्तावित अनुदान सहायता की 28 फरवरी तक पुष्टि करे, उसने यह चेतावनी दी थी कि अगर काठमांडू ने कार्यक्रम को स्वीकार नहीं किया, तो वाशिंगटन हिमालयी राष्ट्र के साथ अपने संबंधों की समीक्षा करेगा और इसके विफल होने की दशा में चीन के हित को जिम्मेदार मानेगा. नेपाल में इसको लेकर राजनीतिक ध्रुवीकरण देखा जा रहा है कि अमेरिकी बुनियादी ढांचा अनुदान को स्वीकार किया जाना चाहिए या नहीं.

    नेपाल सरकार के प्रवक्ता ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की ने कहा कि एमसीसी मुद्दे पर संक्षिप्त चर्चा के बाद गठबंधन के शीर्ष नेताओं की बैठक संपन्न हुई. इसमें प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, सीपीएन (माओवादी सेंटर) अध्यक्ष पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ और सीपीएन-यूनीफाइड सोशलिस्ट के अध्यक्ष माधव नेपाल सहित गठबंधन के अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि चर्चा बेनतीजा रही और अगली बैठक रविवार सुबह होगी जहां इस मुद्दे पर फैसला लिया जाएगा.