UP विधानमंडल का बजट सत्र, कानपुर अग्निकांड की घटना हावी रहने की संभावना..

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उत्तर प्रदेश विधानमंडल का आगामी बजट सत्र कानपुर देहात जिले में मां-बेटी की हाल में हुई मौत, कानून-व्यवस्था और महंगाई समेत अन्य मामलों को लेकर हंगामेदार रहने की संभावना है. विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार को घेरने की योजना बनाई है. वहीं, राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि विपक्ष के पास सदन के पटल पर उसे घेरने के लिए कोई मुद्दा नहीं है. यूपी विधानमंडल का बजट सत्र 20 फरवरी से शुरू होगा और राज्य का बजट 22 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है. समाजवादी पार्टी (सपा) ने 15 फरवरी को कहा था कि वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में कानपुर देहात जिले में एक अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान कथित तौर पर आत्मदाह के कारण एक महिला और उसकी बेटी की मौत का मुद्दा उठाएगी. सपा नेताओं ने कहा कि सोमवार से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए इस मामले पर प्रमुखता से चर्चा की मांग होगी.

गन्ने के दाम नहीं बढ़ाने का मुद्दा विधानसभा में उठाया जाएगा

दरअसल विपक्षी दलों के नेताओं ने यह भी कहा कि हाल में लखनऊ में ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023’ की मेजबानी करने वाली राज्य सरकार से यह भी पूछा जाएगा कि पिछली बैठकों में किए गए निवेश के कितने प्रतिशत वादे को धरातल पर लागू किया गया है. विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते सदस्य उमा शंकर सिंह ने कहा कि कानपुर देहात में मां-बेटी की जान जाने और राज्य सरकार द्वारा गन्ने के दाम नहीं बढ़ाने का मुद्दा विधानसभा में उठाया जाएगा.

उत्तर प्रदेश सरकार के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्षी दलों के विचारों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “विपक्ष के पास (सरकार को घेरने के लिए) कोई मुद्दा नहीं है. जहां तक कानपुर देहात की घटना का संबंध है, कार्रवाई शुरू कर दी गई है.” उन्होंने साफ कहा कि दोषी व्यक्तियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच होगी, जिन्होंने राज्य सरकार के निर्देशों के खिलाफ काम किया है. यह पूछे जाने पर कि क्या विधानसभा में रामचरितमानस पर बहस हो सकती है, मौर्य ने कहा, ‘‘राजनेता कानूनों और विकास पर बोलते हैं और ‘धर्माचार्य’ (धार्मिक शिक्षक) धार्मिक ग्रंथों पर बोलते हैं.’’