Ukraine और Russia के बीच विवाद क्यों ले रहा है विश्व युद्ध का मोड़?

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Why is the dispute between Ukraine and Russia taking the turn of world war?
Why is the dispute between Ukraine and Russia taking the turn of world war?

Ukraine और Russia के बीच जारी विवाद खत्म होता नजर नहीं आ रहा है. यूक्रेन की सीमाओं पर 1 लाख 25 हजार रूसी सेना के जवान खड़े हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि NATO देशों और रूसी सेना के बीच कभी भी युद्ध शुरू हो सकता है.

नमस्कार मैं अमन यादव bhn news में आपका स्वागत करता हूँ, आज हम बात करेंगे Ukraine और Russia के बीच चल रहे विवाद के बारे में और जानेगे अमेरिका इस विवाद में कैसे कूदा.

यूक्रेन को खोना रूस के लिए एक शरीर से अपना सिर काट देने जैसा होगा’ यह बात रूस क्रांति के नायक रहे व्लादिमीर लेनिन ने कही थी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब soviet union टूटा तो Ukraine एक लोकतांत्रिक देश बन गया. लेकिन अब भी रूस के अन्दर एक कसक है कि Ukraine को वापस रूस का हिस्सा होना चाहिए. इसी सपने को साकार करने चले है रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति व्लाम्दिर पुतिन. लेकिन वो दौर कुछ और था और अब का दौर कुछ और है.

विवाद यह है कि यूक्रेन नाटो यानी उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन का सदस्य देश बनना चाहता है और रूस इसका विरोध कर रहा है. नाटो अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच एक सैन्य गठबंधन है, इसलिए रूस नहीं चाहता कि उसका पड़ोसी देश नाटो का मित्र बने. अब अगर यूक्रेन नाटो का हिस्सा बन गया तो रूस हर तरफ से अपने दुश्मन देशों से घिर जाएगा और अमेरिका जैसे देश उस पर हावी हो जाएंगे. अगर यूक्रेन नाटो का सदस्य बन जाता है और रूस भविष्य में उस पर हमला करता है तो समझौते के तहत इस समूह के सभी 30 देश इसे अपने खिलाफ हमला मानेंगे और यूक्रेन की सैन्य सहायता भी करेंगे.

इस विवाद में अमेरिका कहाँ फिट होता है

Ukraine और Russia के विवाद में अमेरिका की अहम भूमिका है. अमेरिका ने अपने 3000 सैनिकों को यूक्रेन की मदद के लिए भेजा है और उनकी तरफ से यह आश्वासन दिया गया है कि वे यूक्रेन की मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे.

सच्चाई यह है कि मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, यूक्रेन का इस्तेमाल सिर्फ अपनी छवि मजबूत करने के लिए कर रहे हैं. पिछले साल अमेरिका को अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुलानी पड़ी थी. इसके अलावा ईरान में अमेरिका कुछ हासिल नहीं कर पाया और तमाम प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण भी कर रहा है. इन घटनाओं ने अमेरिका की सुपर पॉवर इमेज को नुकसान पहुंचाया है. यही वजह है कि जो बाइडेन यूक्रेन-रूस विवाद के साथ इसकी भरपाई करना चाहते हैं.

इस विवाद में भारत का स्टैंड

रूस-यूक्रेन के विवाद में भारत की स्थिति भी अहम है. रूस और अमेरिका दोनों भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं. भारत अभी भी अपने 55 फीसदी हथियार रूस से खरीदता है जबकि अमेरिका के साथ भारत के संबंध पिछले 10 वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं. रूस ने अब तक भारत-चीन सीमा विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया है. अगर भारत यूक्रेन का समर्थन करता है तो वह कूटनीतिक रूप से रूस को चीन के पक्ष में ले जाएगा. शायद यही कारण है कि हाल ही में जब अमेरिका सहित 10 देश संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन पर एक प्रस्ताव लेकर आए भारत ने किसी के पक्ष में मतदान नहीं किया.

भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि इस समय यूक्रेन में करीब 20,000 भारतीय फंसे हुए हैं जिनमें से 18 हजार मेडिकल के छात्र हैं. यूक्रेन और रूस के रिश्ते को समझना बहुत मुश्किल है. यूक्रेन के लोग स्वतंत्र रहना चाहते हैं, लेकिन पूर्वी यूक्रेन के लोगों की मांग है कि यूक्रेन को रूस के प्रति वफादार रहना चाहिए. यूक्रेन की राजनीति में नेता दो गुटों में बंटे हुए हैं. एक दल खुले तौर पर रूस का समर्थन करता है और दूसरा दल पश्चिमी देशों का समर्थन करता है. यही वजह है कि आज यूक्रेन दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच फंसा हुआ है.

अब देखना यह होगा की युद्ध की कगार पर पहुँच गए दो देश क्या बातचीत से मामला सुलझाएंगे या पोस्ट मॉडर्न वर्ल्ड में तीसरा विश्व युद्ध होगा?