UNSC बैठक में भारत ने कहा – अफगानिस्तान में महिलाएं और बच्चे खौफ में, महासचिव बोले – लोगों को अकेले नहीं छोड़ा जा सकता

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    अफगानिस्तान के हालात को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भारत की अध्यक्षता में आपात बैठक हुई. इस बैठक में भारत ने अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई और कहा वहां महिलाएं, पुरुष और बच्चे डर के साए में जी रहे हैं. बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि अफगानिस्तान के एक पड़ोसी देश के रूप में, उसके लोगों के मित्र के रूप में, देश में मौजूदा स्थिति भारत में हमारे लिए बहुत चिंता का विषय है. अफगानी पुरुष, महिलाएं और बच्चे लगातार भय की स्थिति में जी रहे हैं.

    भारतीय प्रतिनिधि ने कहा, ”मौजूदा संकट से पहले, अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से प्रत्येक में भारत की विकास परियोजनाएं चल रही थीं. हम संबंधित पक्षों से कानून और व्यवस्था बनाए रखने, संयुक्त राष्ट्र के राजनयिक और कांसुलर कर्मियों सहित सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान करते हैं.”इसके साथ ही भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अगर आतंकवाद के प्रति सभी रूपों में जीरो टॉलरेंस की नीति है और यह ये सुनिश्चित करता है कि अफगान क्षेत्र का उपयोग आतंकवादी समूहों द्वारा किसी अन्य देश को धमकाने या हमला करने के लिए नहीं किया जाता है, तो अफगानिस्तान के पड़ोसी और इलाके सुरक्षित महसूस करेंगे.

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अंतररराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि वह यह सुनिश्चित करे कि अफगानिस्तान आतंकी संगठनों के लिए एक बार फिर पनाहगाह न बनने पाए. उन्होंने यह भी कहा कि युद्धग्रस्त देश के लोगों को अकेले नहीं छोड़ा जा सकता.

    इस बीच अफगानिस्तान ने कहा है कि काबुल में हालात बेहद चिंताजनक हैं और दहशत का माहौल है. साथ ही अफगानिस्तान के प्रतिनिधि ने तालिबान पर दोहा में हुए समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया है.