प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होगी केंद्रीय कैबिनेट की बैठक, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज शाम 4:30 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक होगी. बताया जा रहा है कि इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में महंगाई, यूक्रेन और कोरोना के बढ़ते मामलों पर चर्चा की संभावना है. बता दें कि देश में एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं. भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 1660 नए मामले सामने आए हैं. इससे संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,30,18,032 हो गई हैं.

वहीं, सक्रिय मरीजों की संख्या घटकर 20,000 से कम रह गई है. वहीं, पिछले 24 घंटे में कोरोना से 4100 लोगों की मौत हो गई है. इससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 5,20,855 हो गई है. बताया जा रहा है कि कई राज्यों ने बैकलॉग क्लियर किया है. इसके कारण मौतों की संख्या इजाफा हुआ है. बता दें कि देश में अब तक 182.87 करोड़ से अधिक लोगों को कोविड-19 रोधी टीके की खुराक दी जा चुकी है.

महंगाई पर हो सकती है चर्चा
वहीं, पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के बाद महंगाई और पेट्रोल डीजल के दामों में वृद्धि को लेकर भी बैठक में चर्चा हो सकती है. शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा था कि वैश्विक स्थिति का असर भारत पर भी पड़ रहा है. अभी युद्ध की स्थिति है और इसका असर सभी देशों पर पड़ रहा है और भारत इससे अछूता नहीं रह सकता है. उन्होंने कहा कि जब ऑयल कंपनियां महंगे तेल खरीदेंगी तो उन्हें उसका दाम बढ़ाना पड़ेगा. युद्ध की वजह से फिलहाल सप्लाई चेन भी बाधित है.

ईंधन के दाम में वृद्धि का जिक्र करते हुए सीतारमण ने कहा कि इसका कारण रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध है। सभी देशों पर इसका असर पड़ा है क्योंकि इससे तेल की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा, ‘1951 में भी पंडित जवाहरलाल नेहरू कह सकते थे कि कोरियाई युद्ध से भारत में महंगाई पर असर पड़ सकता है… लेकिन आज जब विश्व स्तर पर जुड़ी हुई दुनिया में अगर हम कहें कि यूक्रेन (युद्ध) हमें प्रभावित कर रहा है, तो यह स्वीकार नहीं किया जाता है.’

कांग्रेस महंगाई मुक्त भारत अभियान शुरू करेगी
उधर, कांग्रेस महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर 31 मार्च से 7 अप्रैल तक महंगाई मुक्त भारत अभियान शुरू करेगी.

बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 1 महीने से युद्ध चल रहा है. न रूसी सेना पीछे हटने को तैयार है और न ही यूक्रेन के सैनिक हार मानने को राजी हैं. ऐसे में दोनों देशों के बीच यह जंग कब तक जारी रहेगी, यह कहना मुश्किल है. युद्ध विराम को लेकर दोनों देशों के बीच पांच दौर की बैठक भी हो चुकी है लेकिन इस बातचीत से कोई खास समाधान सामने निकलकर नहीं आया.