बिहार की लड़की ने सोनू सूद से मांगी अगरबत्ती बनाने वाली मशीन, अभिनेता ने रखी शर्त, बोलें- पहला पैकेट मुझे देना

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बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद अक्सर परेशान लोगों की मदद करने के लिए जाने जाते हैं। लोग उनसे सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाते रहते हैं, जिनके लिए सोनू सूद हमेशा तैयार रहते हैं। अब उन्होंने बिहार की एक महिला की मदद की है। सोनू सूद ने प्रवासी मजदूरों, जरूरतमंद और गरीब लोगों की मदद करने का सिलसिला लॉकडाउन के दौरान शुरू किया था।

तब से अब तक वह कई लोगों की मदद के लिए आगे आ चुके हैं। अभिनेता का लोगों की मदद करने का यह सिलसिला लगातार जारी है। सोनू सूद से बिहार की एक महिला ने अगरबत्ती बनाने की मशीन मांगी, ताकि वह उससे काम करके अपनी जीविका चला सकें और अपने परिवार का पालन पोषण कर सके। महिला ने ट्विटर पर सोनू सूद से मदद मांगते हुए लिखा, ‘सोनू सूद भैया मेरा नाम ज्योति है और मैं बिहार की रहने वाली हूं। आप हर किसी की मदद कर रहे हैं। मेरी भी थोड़ी मदद कर दीजिए। मुझे अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए एक अगरबत्ती मेकिंग मशीन चाहिए, ताकि मैं अपने परिवार का और अपने बच्चों की भूख मिटा संकू।’

महिला के इस ट्वीट पर सोनू सूद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उसकी मदद करने का एलान किया है, लेकिन अभिनेता ने एक खास शर्त भी रखी है। सोनू सूद ने महिला से सामने शर्त रखते हुए कहा है कि वह अगरबत्ती का पहला पैकेट उन्हें देगी। अभिनेता ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘चलो अब बिहार में अगरबत्ती भी बनाकर देख लेते हैं, आपकी अगरबत्ती बनाने के मशीन भेज रहा हूं। पहला पैकेट मुझे देना’।

सोशल मीडिया पर सोनू सूद का यह ट्वीट वायरल हो रहा है। अभिनेता के कई फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और कमेंट कर उनकी तारीफ कर रहे हैं। आपको बता दें कि सोनू सूद इन दिनों अपनी किताब ‘मैं मसीहा नहीं’को लेकर सुर्खियों में हैं। इस किताब में उन्होंने कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान के अपने अनुभवों को साझा किया है।

पूरी दुनिया में तबाही फैलाने वाली कोरोना महामारी के दौरान जब लोग एक तरफ अपने स्वजनों के अंतिम संस्कार कर रहे थे, तब कुछ लोग प्रभावित मरीजों की सेवा कर रहे थे। लॉकडाउन से प्रभावित प्रवासियों को खाना खिला रहे थे और उन्हें घर पहुंचाने का इंतजाम कर रहे थे। ऐसे ही लोगों में रुपहले पर्दे के मशहूर विलेन सोनू सूद भी शामिल थे। अपने स्तर पर उन्होंने एक छोटी-सी शुरुआत की, जो धीरे-धीरे एक बड़े अभियान में परिवर्तित हो गई। संकटग्रस्त लोगों की मदद के दौरान हुए अनुभवों पर उन्होंने ‘मैं मसीहा नहीं’ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी है। पत्रकार मीना के अय्यर इस पुस्तक की सहलेखिका हैं।