कोरोना संकट में ग्रोथ को बनाए रखने के लिए पूर्ण आपसी विश्वास की जरूरत, अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के लिए उठाए हैं कई कदम: निर्मला सीतारमण

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Nirmala Sitharaman jammu and Kashmir visit

कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर से सहमे उद्योग से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार बातचीत कर रही हैं। उन्होंने मंगलवार को कहा कि संकट की इस घड़ी में सतत वृद्धि को बनाए रखने के लिए सरकार और उद्योगों के बीच पूरा भरोसा होना चाहिए। हम महामारी से निपटने के साथ अर्थव्यवस्था बचाने की भी कोशिश कर रहे हैं। 

उद्योग संगठन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सेमीनार में वित्तमंत्री ने कहा, महामारी की दूसरी लहर के बावजूद केंद्र सरकार कई ऐसे कदम उठा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार को सुनिश्चित किया जा सके। संकट के बीच सतत वृद्धि हासिल करने के लिए उद्योग जगत का साथ आना जरूरी है। सरकार और उद्योग के बीच पूरा भरोसा होना चाहिए। उद्योग जगत को यह महसूस करना होगा कि हम उनकी बेहतरी के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। हमारे बीच अविश्वास का कोई कारण नहीं होना चाहिए। वित्तमंत्री ने रिजर्व बैंक को सरकार का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद अंग बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और केंद्रीय बैंक साथ मिलकर अर्थव्यवस्था और देश की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। हमारी सरकार ने पहले जो कदम उठाए थे, उसका नतीजा है कि दूसरी लहर के बावजूद अर्थव्यवस्था सुधार की राह पर है। सरकार ने पिछले साल 70 दिन का लंबा लॉकडाउन लगाया था।

सरकार लॉकडाउन के पक्ष में बिलकुल नहीं 
सीतारमण ने एक बार फिर दोहराया कि पिछले साल की तरह सरकार देशभर में एकबारगी लॉकडाउन करने के पक्ष में बिलकुल नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कदम से प्रवासी मजदूरों पर बेहद बुरा असर पड़ेगा। अभी सेंटिमेंट में ज्यादा कमी नहीं आई है। लिहाजा हम उद्योग जगत से अपील करते हैं कि वे सरकार पर भरोसा बनाए रखें। महामारी से निपटने के लिए हम टीकाकरण की गति और विस्तार को बढ़ाएंगे। कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए 4,650 करोड़ रुपये की मदद दी जा रही है। सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की ओर से जुलाई तक अधिक मात्रा में वैक्सीन का उत्पादन किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में यह मुफ्त मिलेगी।

अर्थव्यवस्था उबारने के लिए सरकार के साथ है उद्योग जगत : पीएचडी चैंबर
उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने भरोसा जताया कि कोविड-19 महामारी से लड़ाई में भारत न सिर्फ आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि जल्द ही इस संकट से बाहर निकल आएगा। संक्रमण की दूसरी लहर से कई राज्यों में मुश्किल परिस्थितियां बन गई हैं। बावजूद इसके केंद्र और राज्य सरकारों के प्रभावी कदम से जल्द सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ टेलीफोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए उद्योग जगत सरकार के साथ है। 

आर्थिक गतिविधियां बंद होने से कारोबार-नौकरियों का नुकसान : राई
भारतीय खुदरा संगठन (राई) ने चेतावनी दी है कि स्थानीय तौर पर भी आर्थिक गतिविधियां बंद करने से कारोबार और नौकरियों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। राई के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा, लॉकडाउन के नुकसान हम पहले भी देख चुके हैं। दोबारा ऐसा कदम उठाने से लाखों नौकरियां स्थायी तौर पर खत्म हो जाएंगी। खुदरा क्षेत्र पर महामारी का असर सबसे ज्यादा दिख रहा है। सरकार को सख्त निगरानी के साथ मॉल व अन्य गैर-जरूरी उत्पादों की बिक्री को भी अनुमति देनी चाहिए। इन्हें बंद रखना महामारी से निपटने का कोई उपाय नहीं है। 

अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा प्रतिबंधों का असर : क्रिसिल
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने दावा किया है कि राज्यों की ओर से स्थानीय तौर पर लगाए गए लॉकडाउन का भी अर्थव्यवस्था पर असर दिखने लगा है। परिवहन और माल ढुलाई में कमी के साथ जीएसटी ई-वे बिल, ऊर्जा खपत और कारोबारी गतिविधियों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। महाराष्ट्र में 18 अप्रैल तक परिवहन में 17.7 फीसदी गिरावट आई है। इसके अलावा दिल्ली, यूपी, एमपी सहित अन्य राज्यों में भी परिवहन की दरें गिरी हैं। क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच टीकाकरण में आ रही गिरावट ज्यादा चिंताजनक है। 11 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में जहां हर 10 लाख में से 2,554 लोगों को टीका लगता था, वहीं 18 अप्रैल को यह संख्या गिरकर 2,408 पर आ गई है।

2021-22 की विकास दर में 0.5 फीसदी कटौती 
घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन की स्थितियों को देखते हुए भारत के विकास दर अनुमान में कटौती कर दी है। एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि नए आर्थिक प्रतिबंधों के दबाव में 2021-22 के दौरान भारत की विकास दर 10-10.5 फीसदी रह सकती है। एजेंसी ने पहले 11 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया था। इक्रा ने कहा, अप्रैल-जून तिमाही के लिए हमने पहले 27.5 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया था, लेकिन अब यह 20-25 फीसदी के दायरे में रह सकती है। संक्रमण के हालिया बढ़ते मामलों से उपभोक्ताओं के भरोसे में कमी आई है। कारोबारी भरोसा भी 93 फीसदी से गिरकर 90 के करीब पहुंच गया है।