आज किसान जलाएंगे होलिका दहन में तीनों नए कृषि कानूनों की प्रतियां, मिट्टी से करेंगे तिलक

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नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को शनिवार को 123 दिन पूरे हो गए। अपनी मांग को लेकर किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। इस बीच होलिका दहन को लेकर भी तैयारियां पूरी हो गई हैं। रविवार को किसान गाजीपुर, टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराएंगे।

गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रेस प्रभारी शमशेर राणा ने बताया कि बॉर्डर के प्रमुख चौराहे पर होलिका दहन किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल होंगे। बुलंदशहर के भटोना गांव के सदस्यों की टोली द्वारा सदियों से चली आ रही पारंपरिक होली के गीत, ढोल-नगाड़ों के साथ होलिका दहन की जाएगी।

इस दौरान तीनों नए कृषि कानूनों की प्रतियों को भी जलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 29 मार्च को होली मनाने के दौरान रंग-गुलाल का प्रयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि मिट्टी से तिलक किए जाएंगे। क्योंकि, इस आंदोलन में करीब 300 किसान जान गंवा चुके हैं। उनके परिवार इस बार होली नहीं खेलेंगे। इन परिस्थितियों में यहां भी किसान उनके दुख-दर्द में साथ रहेंगे।

टीकरी बॉर्डर पर शनिवार को किसानों ने रोजाना की तरह कृषि कानूनों के खिलाफ मोर्चा संभाला था। उन्होंने बताया कि रविवार को पहले दो घंटे सफाई अभियान चलाया जाएगा। दोपहर एक बजे के बाद किसान जगह-जगह पर तीनों कृषि कानूनों की प्रतियों की होलिका जलाएंगे।

भारतीय किसान यूनियन के नेता हरप्रीत भाऊ ने बताया कि अब से प्रत्येक रविवार को दो घंटे टीकरी बॉर्डर पर सफाई अभियान चलाया जाएगा। रविवार को प्रदर्शन स्थल का कोना-कोना साफ किया जाएगा। बॉर्डर पर दिल्ली और हरियाणा के इलाकों में सरकारी सफाई व्यवस्था बेहद खराब है। किसानों के आने से पहले ही आसपास के क्षेत्र की नालियां पटी हुई थी।

खाली मैदानों में कूड़े की भरमार थी, लेकिन किसानों ने तय किया है कि अब वह अपने आसपास की गंदगी साफ करेंगे। सफाई के साथ-साथ किसानों को मच्छरों से भी राहत मिलेगी। वरिष्ठ किसान नेता पुरुषोत्तम उदत ने बताया कि 26 मार्च को दिल्ली के लोग भले ही दिल्ली पुलिस के डर से भारत बंद के समर्थन में घर से बाहर नहीं निकले, लेकिन किसानों को पता है कि लोग मन से किसानों के साथ हैं।