इमरान खान की सरकार सत्ता से बाहर, शाहबाज़ शरीफ होंगे पाक के नए पीएम

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Pakistan PM Imran Khan
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पीएम इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद पाकिस्तान की सियासत अब नए रास्ते में चलने को तैयार है, ऐसा तय माना जा रहा है. अविश्वास प्रस्ताव में इमरान खान की पार्टी की हार तय है. विपक्ष के नेता नेशनल असेंबली में मौजूद रहे, लेकिन इमरान खान की पार्टी के सांसदों ने सदन छोड़ दिया और वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. इससे तय हो गया कि इमरान खान की हार हो गई. इसके साथ ही इस्लामाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इमरान खान के देश छोड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई है. इस बीच इमरान खान सरकार में मंत्री रहे फवाद चौधरी ने कहा है कि पाकिस्तान में लुटेरों की वापसी हो गई है. इमरान खान की सरकार के गिरने पर नवाज़ शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ के प्रधानमंत्री बनने की पूरी संभावना है.

इससे पहले पाक मीड‍िया में यह खबर आई कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष असद कैसर और उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने इस्तीफा दे दिया है. इस चौकाने वाले घटनाक्रम के बाद वोट‍िंंग शरू होने की जानकारी आई है. बता दें कि पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (CJP) ने रात 12 बजे सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खोलने का फैसला किया क्योंकि नेशनल असेंबली के अध्यक्ष असद कैसर ने प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की अनुमति नहीं दी थी.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले इस्लामाबाद में संसद भवन के बाहर कैदी वैन भी तैनात कर दिए गए.

वहीं, पीएम इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले इस्लामाबाद में पाकिस्तान नेशनल असेंबली के बाहर सुरक्षा तैनात कर दी गई. बताया गया है कि सेना ने इस्‍लामाबाद में सुरक्षा बढ़ा दी.

बता दें कि शीर्ष अदालत के फैसले के बाद सदन का महत्वपूर्ण सत्र अब तक किसी न किसी कारण से सत्र को तीन बार स्थगित किया जा चुका था.

वहीं, इन घटनाओं से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार रात अपने मंत्रिमंडल की आपात बैठक की. प्रधानमंत्री खान को पद से हटाने के लिए विपक्षी दलों को 342 सदस्यीय सदन में 172 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी. वर्ष 2018 में ‘नया पाकिस्तान’ बनाने के वादे के साथ सत्ता में आए खान आर्थिक कुप्रबंधन के दावों से घिर गए, क्योंकि उनकी सरकार विदेशी मुद्रा भंडार भरने और दोहरे अंकों की मुद्रास्फीति को कम करने के मामले में लड़खड़ा रही है.