एलआईसी में 20 फीसदी तक विदेशी निवेशकों के लिए सुरक्षित रखी जा सकती है हिस्सेदारी, जल्द मंजूरी देगी सरकार

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सरकार भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में 20 फीसदी तक विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) की मंजूरी देने पर विचार कर रही है। एक सरकारी सूत्र ने यह जानकारी दी है। सरकार ने एलआईसी आईपीओ के जरिए 12.24 अरब डॉलर (90 हजार करोड़ रुपये) जुटाने का लक्ष्य रखा है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इसमें 10 फीसदी हिस्सेदारी एलआईसी के वर्तमान पॉलिसीधारकों के लिए सुरक्षित रखी जाएगी। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में एलआईसी में इक्विटी विनिवेश को मंजूरी दी है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में एक समिति शेयर बिक्री के आकार पर फैसला करेगी। सरकार ने हाल ही में इस आईपीओ को लेकर एलआईसी अधिनियम-1956 में संशोधन किया है। इसके बाद एलआईसी का संचालन किसी अन्य कंपनी की तरह कंपनी कानून और बाजार नियामक अधिनियम (आईपीओ के बाद) के तहत होगा।

जीवन बीमा कंपनी को हर तीन महीने पर अपना बैलेंसशीट तैयार करना होगा और इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके अलावा, बाजार नियामक सेबी ने भी इस आईपीओ को लेकर नियमों में कुछ बदलाव किया है। इसके तहत, जिस कंपनी का बाजार पूंजीकरण एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, वह कुल मूल्य के पांच फीसदी के बराबर आईपीओ ला सकती है। एलआईसी ने आईपीओ के लिए एसबीआई के पूर्व एमडी और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के पूर्व एमडी-सीईओ अरिजीत बासु को सलाहकार नियुक्त किया है। 

सरकार ने एलआईसी आईपीओ के प्रबंधन के लिए 10 मर्चेंट बैंकरों की नियुक्ति कर दी है। इनमें गोल्डमैन सॉक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स, नोमुरा फाइनेंशियल एडवाइजरी एंड सिक्योरिटीज इंडिया, एसबीआई कैपिटल मार्केट, जेएम फाइनेंशियल, एक्सिस कैपिटल, बोफा सिक्योरिटीज, जेपी मॉर्गन इंडिया, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज और कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी लिमिटेड शामिल हैं।

निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंध विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने ट्वीट कर बताया कि सरकर ने आईपीओ के लिए बुक रनिंग लीड प्रबंधकों और अन्य सलाहकारों का चयन कर लिया है। दीपम हिस्सेदारी बिक्री के लिए विधि सलाहकार की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। इसके लिए बोली भेजने की अंतिम तिथि 16 सितंबर है। कंपनी का आईपीओ जनवरी-मार्च, 2022 तिमाही में आने की उम्मीद है।