UP: कोरोना महामारी के वजह से दुर्गापूजा पंडालों और रामलीला के मंचन पर नहीं है पाबंदी, लेकिन माननी होगी ये शर्त

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कोरोना महामारी की वजह से तमाम धार्मिक आयोजनों पर पाबंदियां थी, लेकिन अब धीरे-धीरे अनलॉक प्रक्रिया के तहत रियायत दी जा रही है. 17 अक्टूबर से शुरू हो नवरात्रि के दौरान जगह-जगह लगने वाले दुर्गा पूजा पंडालों और रामलीला के मंचन को भी इजाजत दी गई है. लेकिन इसके लिए कुछ शर्तों को मानना पड़ेगा. इसके साथ ही अगले साल प्रयागराज के संगम की रेती पर लगने वाले माघ मेले को भी कोविड गाइडलाइन के मुताबिक सशर्त मंजूरी दी गई है.

प्रयागराज में योगी सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि नवरात्रि में सजने वाले दुर्गापूजा पंडालों पर भी कोई पाबंदी नहीं है. सीमित संख्या में कोविड के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए लोग देवी प्रतिमाओं की स्थापना करेंगे. हांलांकि उन्होंने कहा कि इसके लिए समितियों को पहले डीएम से अनुमति लेनी होगी उन्होंने कहा कि रामलीलाओं के मंचन को भी सरकार ने कोविड गाइडलाइन के पालन के साथ इजाजत दे दी है. कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि कोविड की महामारी के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए किसी भी तरह से कोविड गाइड लाइन का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है. इन आयोजनों में कोविड के प्रोटोकॉल का लोगों को भी विशेष ध्यान रखना होगा, ताकि लोगों की धार्मिक आस्था पूरी होने के साथ ही साथ कोरोना का संक्रमण भी न फैले.

सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि संगम की रेती पर हर साल लगने वाले माघ मेले की परम्परा इस साल भी नहीं टूटेगी. कोविड की गाइड लाइन का पालन कराने के साथ ही माघ मेले का आयोजन होगा. राज्य सरकार ने मेले के आयोजन से जुड़े अधिकारियों और प्रयागराज मेला प्राधिकरण से इसके लिए प्रस्ताव मांगा है, जिसके आधार पर ही राज्य सरकार माघ मेले के आयोजन को लेकर दिशा निर्देश जारी करेगी.

गौरतलब है कि पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट में दुर्गा पूजा पंडालों को लगाने के लिए अनुमति को लेकर एक याचिका दाखिल की गई थी. इस याचिका में पूजा पंडालों और उनसे जुड़े लोगों की रोजी रोटी का जिक्र करते हुए अनुमति मांगी गई थी. हालांकि कोर्ट याचिका को ख़ारिज कर दिया था और कोरोना महामारी को देखते हुए अंतिम निर्णय जिला प्रशासन और सरकार पर छोड़ा था.