रूस ने बॉर्डर पर तैनात किए 7 हजार से अधिक सैन्य बल

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russian army
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रूस और यूक्रेन के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है. आक्रमण को लेकर बनी आशंकाओं के बीच यूक्रेन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने बुधवार को अपना झंडा लहराते देश की एकता का प्रदर्शन करते हुए मास्को के दबाव को कम करने की कोशिश की, जबकि अमेरिका की ओर से चेताया गया कि रूस ने भले ही यूक्रेन के बॉर्डर से सैनिकों को वापस बुलाया जाने की बात कही हो लेकिन दावा किया गया है कि मास्को ने बॉर्डर्स के पास 7,000 अतिरिक्त सैनिकों को जोड़ा है.

अभी तक के जो हालात हैं उसके आधार पर कहा जा सकता है कि रूस की ओर से यूक्रेन पर किसी तरह का हमला नहीं किया गया है. संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों का मानना है कि यूरोप की सुरक्षा और संतुलन में आर्थिक स्थिरता के साथ खतरा अभी भी बरकरार है.

पश्चिम के अनुमानों के अनुसार, रूस ने यूक्रेन के पूर्व, उत्तर और दक्षिण में 150,000 से अधिक सैनिकों को तैनात कर रखा है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि वह संकट से शांतिपूर्ण रास्ता चाहते हैं, और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी वादा किया कि अमेरिका कूटनीति को “हर मौका” देना जारी रखेगा, लेकिन उन्होंने मास्को के इरादों के बारे में एक संदेह भी जताया. बाइडेन ने इस बात पर भी जोर दिया कि वाशिंगटन और उसके सहयोगी यूक्रेन की संप्रभुता का सम्मान करते हुए “बुनियादी सिद्धांतों का त्याग” नहीं करेंगे.

रूसी रक्षा मंत्रालय के वीडियो में क्रीमिया से दूर एक पुल के पार बख्तरबंद गाड़ियों से लदे ट्रेन को वापस जाते दिखाया गया है, काला सागर प्रायद्वीप जिसे रूस ने 2014 में यूक्रेन से जोड़ा था. इसने यह भी घोषणा की कि ट्रेनों में अधिक टैंक यूनिट्स को लोड किया गया ताकि वे अभ्यास प्रशिक्षण के बाद अपने स्थायी ठिकानों पर वापस जा सकें.

इस ग्रुप में आरमीनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किरगिस्तान औऱ तजासिक्सान शामिल हैं। तिरुमूर्ति ने अफगानिस्तान पर जोर देते हुए कहा कि सेंट्रल एशिया के देशों को इस ओर ध्यान देना चाहिए और नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, रीजनल और सब रीजनल ऑर्गनाइजेशन को अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभानी है। विवादों को हल करने में इनकी अहम भूमिका है। हम यूएन और रीजनल ऑर्गानाइजेशन के सामंजस्य का समर्थन करते हैं। 

बता दें कि बीते कुछ महीनों में अफगानिस्तान की स्थिति में तेजी से परिवर्तन हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफगानिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं और साथ ही विदेशी सहयोग और अफगानी संपत्तियों पर भी रोक लग गई है। वहीं तालिबान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता की मांग कर रहा है जिससे कि वह इस बुरी आर्थिक हालत से बाहर आ सके।

अगस्त में सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित करते हुए कहा था कि अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि उसकी धरती पर आतंकवाद को बढ़ावा नहीं मिलेगा औऱ किसी अन्य देश को परेशान करने की कोशिश नहीं करेगा। यह प्रस्ताव 15 में से 13 वोटों के साथ पास हो गया था। रूस और चीन ने इसका समर्थन नहीं किया था।