RBI ने बैंकों को दिया आदेश; आपके खाते में 5 नवंबर तक आ जाएगी ब्‍याज पर ब्‍याज से मिली छूट की रकम

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RBI RECRUITEMENT
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सभी सरकारी-निजी बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों को आदेश दिया है कि ब्‍याज पर ब्‍याज माफी योजना को 5 नवंबर 2020 से लागू कर दिया जाए. दरअसल, केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि 2 करोड़ रुपये तक के लोन पर 6 महीने तक मोरेटोरियम सुविधा लेने वाले लोगों पर लगाए गए ब्‍याज पर ब्‍याज को माफ कर दिया जाएगा. वित्त मंत्रालय के वित्त सेवा विभाग के मुताबिक, 2 करोड़ रुपये तक के लोन अकाउंट पर ही लेनदारों को ब्याज पर ब्याज माफी की राहत दी जाएगी.

वित्‍त सेवा विभाग के मुताबिक, कर्जदाता संचयी ब्याज और साधारण ब्याज के अंतर की राशि आपके लोन अकाउंट में क्रेडिट करेंगे. यह राशि 1 मार्च 2020 से लेकर 31 अगस्त 2020 के बीच लोन मोरेटोरियम की अवधि के दौरान के लिए ही होगी. लोन अकाउंट में इस रकम को क्रेडिट करने के बाद उधारकर्ताओं के पास 15 दिसंबर 2020 तक सरकार से इसकी भरपाई के लिए दावा करने का मौका होगा. अब आरबीआई ने सभी बैंकों को 5 नवंबर तक इस अमाउंट को लोन अकाउंट में क्रेडिट करने को कहा है.

केंद्र सरकार की यह योजना सभी उधार देने वाली संस्थाओं पर लागू होगा. इसमें सभी सरकारी व निजी बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (NBFCs), हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान और नेशनल हाउसिंग बैंक शामिल हैं. योजना आठ तरह के लोन पर लागू होगी. इनमें एमएसएमई लोन, एजुकेशन लोन, हाउसिंग लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, ऑटोमोबाइल लोन, प्रोफेशनल्स को दिए गए पर्सनल लोन और कंजम्प्शन लोन शामिल हैं. वहीं, 29 फरवरी 2020 या इससे पहले 2 करोड़ रुपये तक का लोन लेने वाले लोगों को ही योजना का फायदा मिलेगा.

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी लेटर में योजना का फायदा लेने के लिए शर्त रखी गई है कि 29 फरवरी 2020 तक आपका लोन अकाउंट स्टैंडर्ड होना चाहिए. इसका मतलब है कि यह लोन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स की श्रेणी में नहीं होना चाहिए. योजना लागू होने से अब लोन मोरेटोरियम सुविधा लेने पर बैंकों की ओर से वसूली जा रही ‘ब्याज पर ब्याज’ के तौर पर रकम आपकी मासिक किस्‍त से कम हो जाएगी. भले ही आपने लोन मोरेटोरियम का फायदा नहीं उठाया हो. आरबीआई की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सभी कर्जदाता तय समय के भीतर जरूरी कार्रवाई करें.