म्‍यूचुअल फंड्स निवेशकों के लिए बड़ी खबर, SEBI ने नियमों में किया बदलाव

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कैपिटल मार्केट रेग्‍युलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंड्स निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए इंटर स्‍कीम ट्रांसफर के मानकों को सख्त कर दिया है. बाजार नियामक के मुताबिक, एक फंड हाउस की ओर से लिक्विडिटी बढ़ाने की कोशिश करने और खत्‍म होने के बाद ही इंटर-स्कीम ट्रांसफर किया जा सकता है. इनमें योजनाओं में उपलब्ध नकद व कैश इक्विवेलेंट एसेट्स का इस्‍तेमाल और बाजारों में स्‍कीम एसेट्स की बिक्री शामिल होगी. सेबी के मुताबिक, यह सर्कुलर 1 जनवरी से लागू होंगे.

सेबी के मुताबिक, इंटर स्‍कीम ट्रांसफर या इसके जैसी किसी भी योजना पर विचार करने से पहले बाजार उधारी का इस्तेमाल करना फंड मैनेजर के विवेक पर आधारित होगा, लेकिन फंड मैनेजर्स को यूनिट होल्डर्स के हित को ध्यान में रखना होगा. इसी तरह बाजार उधारी या सिक्‍योरिटी बेचने का विकल्प किसी भी संयोजन में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें भी यह जरूरी नहीं कि इसी क्रम में हो. अगर बाजार उधारी और सिक्‍योरिटी बेचने का विकल्प इस्तेमाल नहीं किया जाता है तो इसका कारण तथ्‍य के तौर पर दर्ज किया जाएगा.

बाजार नियामक चाहता है कि फंड हाउस हर स्कीम के लिए ‘तरलता जोखिम प्रबंधन मॉडल’ रखें. इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि उचित तरलता आवश्यकताएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध हों. सूत्रों के मुताबिक, ऐसा करने का उद्देश्य तरलता लाने के लिए फंड हाउस को इंटर स्‍कीम ट्रांसफर का इस्तेमाल करने से रोकना है. फंड हाउस को अपनी योजनाओं में पर्याप्त तरलता को सुनिश्चित करना होगा ताकि इससे बचा जा सके. सेबी के अनुसार, सिक्‍योरिटी की किसी भी ‘इंटर स्‍कीम ट्रांसफर’ की अनुमति नहीं होगी. आंतरिक क्रेडिट जोखिम मूल्यांकन के आधार पर अगर मीडिया में नकारात्मक खबरें या अफवाहें हैं तो सिक्‍योरिटीज को लेकर अलर्ट जारी किया जाएगा.

अगर इंटर स्‍कीम ट्रांसफर के बाद सिक्‍योरिटी चार महीने के भीतर डिफॉल्ट हो जाती है तो फंड मैनेजर को ऐसी सिक्‍योरिटीज खरीदने के लिए ट्रस्‍टीज को पूरी जानकारी देनी होगी. क्रेडिट जोखिम योजनाओं में इंटर स्‍कीम ट्रांसफर के गलत इस्‍तेमाल से सुरक्षा के लिए ट्रस्टी यह सुनिश्चित करेंगे कि फंड मैनेजर्स और मुख्य निवेश अधिकारियों के प्रदर्शन प्रोत्साहन पर नकारात्मक असर पड़े. ट्रांसफर स्कीम को क्रेडिट रिस्क स्कीम के मामले में छोड़कर ट्रांसफर और ट्रांसफर स्कीमों के लिए अलग-अलग कारणों का हवाला नहीं दिया जा सकता है.