किसान आंदोलन: नेताओं के बीच दरार, बागपत में प्रदर्शनकारियों को हटाया गया, BKU के धरना वापस लेने से चिल्ला बॉर्डर खुला

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बीते दो महीने से जारी किसान आंदोलन के भविष्य के लिए अगले दो-तीन दिन बेहद अहम हैं। गणतंत्र दिवस हिंसा के बाद जहां किसान नेताओं के बीच दरार पैदा हुई है, वहीं पहली बार दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर डटे आंदोलनकारियों की संख्या में कमी आई है। अगर अगले एक-दो दिनों में आंदोलनकारियों की संख्या और घटी तो किसान संगठनों के लिए सरकार पर दबाव बनाना बेहद मुश्किल होगा।

गौरतलब है कि आंदोलनकारियों की संख्या कम होने और नेताओं के बीच मतभेद सामने आने के कारण ही सरकार की ओर से गणतंत्र दिवस हिंसा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही। सरकार चाहती है कि आंदोलन अंतर्विरोधों के कारण खुद कमजोर हो जाए।

हिंसा के बाद कई दौर की बैठक गणतंत्र दिवस के बाद भाजपा और सरकार में अगल-अलग कई दौर की बैठक हुई। पहले मंगलवार को देर रात भाजपा अध्यक्ष की संगठन महासचिव बीएल संतोष और पार्टी महासचिवों के साथ मैराथन बैठक हुई।

इसी दिन गृह मंत्री अमित शाह ने गृह सचिव,आईबी प्रमुख सहित आला अधिकारियों के साथ बैठक की। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में भी किसान आंदोलन पर चर्चा हुई। जबकि सूत्रों के मुताबिक किसान आंदोलन के संदर्भ में बुधवार को गृह मंत्री और कृषि मंत्री के बीच भी बातचीत हुई।

संसद मार्च साबित होगा लिटमस टेस्ट किसान आंदोलन के लिए एक फरवरी का संसद मार्च लिटमस टेस्ट साबित होगा। गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के कारण अब सरकार की ओर से इस मार्च को अनुमति देने की संभावना नहीं बची है।

इसके अलावा दो महीने से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानोंकी संख्या में बुधवार को कमी देखी गई है। अगर किसानों के घर वापसी का सिलसिला जारी रहा तो किसान संगठन संसद मार्च और कृषि कानून के संदर्भ में सरकार परपहले की तरह दबाव नहीं बना पाएंगे।

पंजाब के संगठन हुए सक्त्रिस्यइस बीच पंजाब के किसान संगठन सीमा पर किसानों की संख्या पूर्व की तरह हीबरकरार रखने के लिए नए सिरे से सक्रिय हुए हैं। इन संगठनों की योजना पंजाब से नए सिरे से भीड़ जुटाने की है। सूत्रों का कहना है कि इस आशय की सूचना मिलने के बाद केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार को आगाह किया है।