किसान आंदोलन: दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन को लेकर SC में सुनवाई, किसानों ने लिखित में ठुकराया सरकार का प्रस्ताव

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कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन 21वें दिन भी जारी है। किसानों और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सरकार कुछ संशोधन पर अड़िग है तो किसान कृषि कानूनों को वापस कराने की मांग पर अड़े हैं। अब किसानों को सरकार को लिखित जवाब दे दिया है कि उन्हें सरकार का संशोधन का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। वहीं, आज कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हो रहे किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। दायर याचिका में कहा गया है कि धरना-प्रदर्शन से आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है। किसानों ने आज चिल्ला बॉर्डर जाम करने की चेतावनी है।

सरकार ने जब से किसानों को लिखित प्रस्ताव भेजा था उसके बाद से ही सरकार यह कह रही थी कि किसानों ने उनका जवाब नहीं दिया है। इसी के चलते आज संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से प्रोफेसर दर्शन पाल ने कृषि मंत्री को प्रस्ताव का जवाब लिखित में दिया है। इसमें उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार का प्रस्ताव नामंजूर है। इस पत्र में लिखा है, ‘आपसे प्राप्त किए गए प्रस्ताव और पत्र के संदर्भ में आपके माध्यम से सरकार को सूचित करना चाहते हैं कि किसान संगठनों ने उसी दिन एक संयुक्त बैठक की और आपकी तरफ से दिए गए प्रस्ताव पर चर्चा की और इसे अस्वीकार कर दिया, क्योंकि 5 दिसंबर 2020 को सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा मौखिक प्रस्ताव का ही लिखित प्रारूप था। हम अपनी मूल बातें पहले ही विभिन्न दौर की बातचीत में मौखिक तौर पर रख चुके थे, इसीलिए, लिखित जवाब नहीं दिया। हम चाहते हैं कि सरकार किसान आंदोलन को बदनाम करना बंद करे और दूसरे किसान संगठनों से समानांतर वार्ता बंद करे।’

किसान आंदोलन भी टुकड़े- टुकड़े में अब ‘समझौते’और ‘संघर्ष’ की दिशा में बढ़ चला है। आंदोलन से जुड़े कई संगठन नए सिरे से बातचीत का मन बना रहे हैं, वहीं संयुक्त मोर्चा के नाम पर पंजाब की जत्थेबंदियों ने एकजुट आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है।