किसान आंदोलन चक्का जाम : हरियाणा में युवाओं को उकसाकर बवाल कराने की आशंका, किसान नेताओं के सामने बढ़ रही चुनौती

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किसानों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए चक्का जाम का एलान भले ही कर दिया हो लेकिन इस चक्का जाम में शांति व्यवस्था बनाए रखना किसान नेताओं के लिए बड़ी चुनौती होगी। इस चक्का जाम में आशंका जताई जा रही है कि किसानों को उकसाकर बवाल कराया जा सकता है। इसलिए ही किसान नेताओं की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। 

ट्रैक्टर परेड के दौरान बवाल के बाद से किसान नेता हर कदम फूंककर रख रहे हैं और चक्का जाम में शांति व अहिंसा पर जोर दिया जा रहा है। जिसमें सबसे ज्यादा युवा किसानों को संदेश दिया जा रहा है कि आंदोलन को तोड़ने वाले उकसाने के लिए कुछ भी करें, लेकिन किसानों को शांत रहकर ही सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों, राहगीरों से अभद्रता नहीं करने की अपील की गई और चक्का जाम के दौरान शरारती तत्वों पर नजर रखने के लिए वालंटियर लगाए जाएंगे। 

कृषि कानून रद्द कराने की मांग कर रहे किसानों की शांतिपूर्ण आंदोलन चलाने में मिसाल पेश की जाती थी कि इतना लंबा आंदोलन होने के बावजूद किस तरह से किसान व्यवस्था बनाकर शांतिपूर्ण तरीके से बैठे हुए हैं। ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल के बाद हर किसी की चिंता बढ़ी हुई है और उसको देखते हुए ही संयुक्त किसान मोर्चा को अपनी एक फरवरी को संसद मार्च की रणनीति बदलनी पड़ी थी। 

किसान नेताओं को खुद भी डर था कि दिल्ली की घटना के बाद जिस तरह से माहौल गरम था, उसको देखते हुए संसद मार्च के दौरान भी बवाल हो सकता है। ऐसे में आंदोलन को अभी तक केवल धरने तक सीमित रखा जा रहा था और अब किसानों का शनिवार को चक्का जाम होगा। 

युवाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। यह माना जा रहा है कि चक्का जाम के दौरान सबसे पहले युवाओं को उकसाया जा सकता है, जिससे वह बेकाबू होकर बवाल करने लगे। किसान नेताओं ने युवाओं को साफ कहा है कि अगर उनको कोई उकसाता है और किसी तरह का भड़काऊ भाषण भी दिया जाता है तो उनको केवल शांत रहना है। यह भी कहा गया है कि चक्का जाम के दौरान कोई निकलने का प्रयास करता है तो उसकी परेशानी को देखकर वाहन निकलने दिया जाए। किसी के साथ भी जबरदस्ती नहीं करनी है, क्योंकि जबरदस्ती करने से माहौल बिगड़ता है।