विदेश मंत्री एस जयशंकर: हिंद-प्रशांत अतीत नहीं, भविष्य का संकेत

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s jaishankar
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल पर कहा कि हिंद-प्रशांत अवधारणा दबदबा बढ़ाने के दृष्टिकोण की अस्वीकृति है। यह जाहिर करती है कि कुछ देशों के फायदे के लिए दुनिया को रोका नहीं जा सकता। हिंद-प्रशांत अतीत का नहीं बल्कि भविष्य का संकेत है और शीतयुद्ध की मानसिकता वालों को इन इरादों को देखना होगा।  

जयशंकर ने शुक्रवार को ग्लोबल टाउन हॉल कार्यक्रम को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए कहा, हालिया समय में हिंद-प्रशांत विचारधारा की मान्यता बढ़ी है। इस पर आसियान का नजरिया भी उल्लेखनीय है। विभिन्न देशों के अलावा हमने जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड को भी यह दृष्टिकोण अपनाते हुए देखा है।

वक्त की जरूरत है कि इसे व्यावहारिक आकार दिया जाए। यह क्वाड की तरह विभिन्न स्तर पर राजनयिकों के बीच विचार विमर्श के जरिये हो सकता है। यह समुद्री सुरक्षा, समुद्री पारिस्थितिकी, समुद्री संसाधन, क्षमता निर्माण और संसाधन का बंटवारा, आपदा का जोखिम घटाने और प्रबंधन के सात स्तंभों पर आधारित है। किसी भी नजरिये से हिंद-प्रशांत क्षेत्र वर्तमान हकीकत की ज्यादा समकालीन व्याख्या है और ऐसे परिदृश्य में व्यापक सहयोग की जरूरत है ।

जयशंकर ने कोरोना संकट के दौरान भारत की प्रभावी प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा, कोरोना की चुनौती से निपटने में भारत ने दृढ़ संकल्प और अनुशासन दिखाया। एक देश जो वेंटिलेटर, टेस्टिंग किट, पीपीई किट और एन-95 मास्क नहीं बनाता था, आज न सिर्फ अपनी जरूरत पूरी कर रहा है, बल्कि दूसरे देशों में इसका निर्यात कर रहा है। हमने कम समय में प्रभावशाली इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया। मरीजों के ठीक होने की उच्च दर और कम मृत्युदर इसका प्रमाण है।