एस जयशंकर ने की जापान के विदेश मंत्री से बात, अफगानिस्तान-दक्षिणी चीन सागर समेत कई मुद्दों पर हुई चर्चा

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    s jaishankar
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    अफगानिस्तान के घटनाक्रमों, दक्षिण चीन सागर में स्थिति और एक मुक्त एवं खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के तरीकों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर तथा उनके जापानी समकक्ष हयाशी योशीमासा के बीच सोमवार को टेलीफोन पर बातचीत हुई. जापानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि दोनों मंत्रियों ने क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की और पूर्वी चीन सागर व दक्षिण चीन सागर में बल पूर्वक यथास्थिति में बदलाव करने की किसी भी एकतरफा कोशिश के प्रति अपना ‘‘कड़ा विरोध’’ साझा किया.

    इसमें कहा गया है कि दोनों विदेश मंत्रियों ने जापानी प्रधानमंत्री फुमिया किशिदा की भारत यात्रा को शीघ्र मूर्त रूप देने के लिए साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया और कहा कि दोनों पक्ष जापान-भारत ‘टू प्लस टू’ मंत्रीस्तरीय वार्ता के अगले चरण के लिए समन्वय करेंगे. बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष लचीली आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करके आर्थिक सुरक्षा पर सहयोग मजबूत करेंगे.

    मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने म्यामां और अफगानिस्तान जैसी क्षेत्रीय स्थिति से निपटने के लिए सहयोग और बढ़ाने का फैसला किया. उन्होंने कोविड-19 से निपटने और आतंकवाद का मुकाबला करने में सहयोग करने का भी संकल्प लिया. जापानी विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल का निर्माण आगे बढ़ाने की कोशिशें जारी रखने का भी फैसला किया.’’

    पीएम मोदी ने भी की थी जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से बात
    बीते महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से बात की थी और उन्हें जापान के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर बधाई दी थी. दोनों नेताओं ने इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और जापान के बीच सहयोग को और मजबूत करने को लेकर चर्चा की थी. मोदी ने एक ट्वीट में कहा था, “जापान के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर फुमियो किशिदा को बधाई देने के लिए उनसे बात की. मैं भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने व भारत-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं.”

    प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इस बीच एक बयान में कहा था कि दोनों नेताओं ने भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी में तेजी से हो रही प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और उच्च-प्रौद्योगिकी एवं भविष्य में उभरने वाले क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक बढ़ाने की संभावना पर सहमति व्यक्त की. प्रधानमंत्री ने जापानी कंपनियों को और अधिक निवेश के माध्यम से भारत के आर्थिक सुधारों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया था. पीएमओ ने कहा था कि दोनों नेताओं ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत और जापान के बीच दृष्टिकोणों के बढ़ते सामंजस्य तथा मजबूत सहयोग के बारे में भी चर्चा की थी. उन्होंने इस संदर्भ में क्वाड फ्रेमवर्क के तहत सहयोग की प्रगति की समीक्षा की थी.