अफगानिस्तान संकट से भारतीय बाजारों पर पड़ने लगा महंगाई का असर, ड्राई फ्रूट के बढ़ने लगे दाम

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अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे के बाद अब देश और दिल्ली के व्यापार पर बड़ा असर पड़ने लगा है. अफगानिस्तान संकट के बाद व्यापारियों की चिंता ज्यादा बढ़ गई है. देश की राजधानी दिल्ली और एशिया की सबसे बड़ी ड्राई फ्रूट मार्केट माने जाने वाली खारी बावली में इस संकट का बड़ा असर देखने को मिल रहा है. इससे व्यापारी बेहद परेशान भी होने लगे हैं.

एशिया की सबसे बड़ी ड्राई फ्रूट मार्केट खारी बावली में इसका बड़ा असर यह देखने को मिल रहा है कि अफगानिस्तान से पिछले 1 सप्ताह से माल आना बंद हो गया है और इससे पहले जो माल अफगानिस्तान से चल चुका था, वह भी अभी रास्ते में ही है. इस बीच अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन हो गया और सत्ता पर तालिबान काबिज हो गया है. इस वजह से अब जो माल अफगानिस्तान से निकलने के बाद रास्ते में ही फंसा है और उसकी सप्लाई अभी तक नहीं हुई है, उसके भी अब भाव अचानक से बढ़ गए हैं.

ड्राई फ्रूट्स के कारोबार से जुड़े व्यापारियों की माने तो अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत आने की वजह से वहां से सप्लाई होने वाले ड्राई फ्रूट्स को लेकर अब संकट गहराता नजर आने लगा है. अफगानिस्तान में बिगड़े माहौल के बाद अब भारत में भी ड्राई फ्रूट्स के दामों में तेजी से उछाल आना शुरू हो गया है.

व्यापारियों की मानें तो अफगानिस्तान और भारत के बीच ड्राई फ्रूट्स का कारोबार बड़े लेवल पर होता है. कारोबार से जुड़े व्यापारी बताते हैं कि 20 से 25 फ़ीसदी तक ड्राई फ्रूट्स का व्यापार अफगानिस्तान पर ही निर्भर करता है.

बताते चलें कि अफगानिस्तान से सबसे ज्यादा ड्राई फ्रूट्स के जो आइटम भारत आयात होते हैं, उनमें अखरोट, बादाम, पिस्ता, अंजीर, मुनक्का, किसमिश, सूखे खुबानी आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं. इसके अलावा अनार, सेब, चेरी, खरबूजा और मसाले जैसे हींग, जीरा और केसर का भी आयात अफगानिस्तान से किया जाता है.

व्‍यापारी सुभाष खंडेलवाल का दोनों देशों के बीच व्‍यापार‍िक गत‍िव‍िध‍ियों व समझौतों पर कहना है क‍ि एप्रीकॉट और औषधीय जड़ी बूटियां भी अफगानिस्तान से आयात की जाती हैं. अगर भारत से निर्यात की बात करें तो भारत मुख्य रूप से चाय,  कॉफी, कपास, काली मिर्च आदि का निर्यात अफगानिस्तान को करता है.

वहीं व्यापारियों का यह भी मानना है कि ऐसा नहीं है कि इन आइटम्स का आयात किसी ओर देश से नहीं किया जा सकता बल्कि इसके पीछे बड़ी वजह अफगानिस्तान से आने वाले ड्राई फ्रूट के आइटम की अच्छी क्वालिटी है. इस वजह से भारत इन सभी आइटम्स का आयात अफगानिस्तान से करता है.

दिल्ली की बात करें तो व्यापारी संगठन चैम्बर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है क‍ि यहां से लगभग 1,000 करोड रुपए का कारोबार प्रतिवर्ष अफगानिस्तान के साथ होता है. दिल्ली से कपड़े , दवाइयां, मेडिकल उपकरण, ऑटो पार्ट्स आदि वस्तुएं अफगानिस्तान जाती हैं. विशेषकर चांदनी चौक के कपड़ा बाजार से काबुल और कंधार में लेडीज सूट व कॉटन के कुर्ते जाते हैं.

गोयल का कहना है क‍ि पिछले वित्त वर्ष 2020-2021 में भारत और अफगानिस्तान के बीच लगभग 10,000 करोड रुपए का व्यापार हुआ था. भारत की तरफ से अगर निर्यात की बात करें तो 2020-21 में अफगानिस्तान को लगभग 6,000 करोड रुपए का निर्यात भारत ने किया था जबकि लगभग 3,800 करोड रुपए के उत्पादों का आयात भारत में अफगानिस्तान से किया गया था. दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान के उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार भारत है.

लेकिन अफगानिस्तान में मचे सियासी संकट के चलते अब भारत में हालात ऐसे हो गए हैं कि 1 सप्ताह से ऊपर का वक्त हो चला है और अफगानिस्तान से आयात होने वाला सभी आइटम पूरी तरह से ठप्प हो गया है. आइटम्स के आयात नहीं होने की वजह से मार्केट में ड्राई फ्रूट्स की धीरे-धीरे किल्लत बढ़ने लगी है और माना जा रहा है कि अगर इस तरह से ही इसकी किल्लत बढ़ती रही तो जल्दी ही माल कोल्ड स्टोरेज में तब्दील हो जाएगा. इसके बाद माल की मार्केट में उपलब्धता बहुत ही कम हो जाएगी या कहें कि इसको रोक दिया जाएगा.

इसके पीछे बड़ी वजह यह हो सकती है कि दीपावली के दौरान इसकी डिमांड और तेज होगी जिसके बाद इसके दामों में बेहद उछाल आएगा. व्यापारी इसको कोल्ड स्टोरेज से निकालकर 2 गुना से 3 गुना ज्यादा दाम पर बेच कर मोटा मुनाफा अर्जित करेगा. इसका सीधा-सीधा असर आम आदमी की जेब पर ही पड़ेगा.

खारी बावली के अन्‍य व्‍यापारी राजीव बत्रा का कहना है क‍ि अफगान‍िस्‍तान में राजनी‍त‍िक संकट के बाद ड्राई फ्रूट्स के दामों में 100 से 200 रुपये प्र‍त‍ि क‍िलोग्राम का इजाफा तो आ चुका है. आसार यही हैं क‍ि जब तक वहां हालात नहीं सुधर जाते तब तक मार्केट्स में इन चीजों के दामों में कमी आने की बजाय और उछाल आएगा. अभी तो हालात वहां ऐसे बने है क‍ि व्‍यापारी वहां अपने जान और माल की सुरक्षा में जुटा हुआ है. फेस्‍टि‍वल सीजन में इसके दामों में और बढ़ने की उम्‍मीद है.

व्यापारी भी इस बात को खुलकर कह रहे हैं कि अगर अफगानिस्तान में इसी तरह के हालात रहे और भारत-अफगानिस्तान के बीच व्यापार को लेकर कोई रास्ता नहीं निकाला गया तो दीपावली, दशहरा के दौरान ड्राई फ्रूट्स के दाम आसमान छू जाएंगे. इस दौरान इन आइटम्स की भारी डिमांड होती है. पिछले 3-4 दिनों में ड्राई फ्रूट्स के दामों में प्रति किलो ₹100 तक का इजाफा रिकॉर्ड किया गया है.

बताया जाता है कि ड्राई फ्रूट्स की मौजूदा कीमतों में करीब 5 से 10 फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है जिसके आने वाले समय में और बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है.

इस बीच देखा जाए तो इंडो-अफगान चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेज‍िडेंट कंवर जीत बजाज का कहना है क‍ि उनको उम्‍मीद है भारत और अफगान‍िस्‍तान के बीच चल रहा 20 साल पुराना व्‍यापार‍िक समझौता शायद समाप्‍त नहीं होगा. इसका बंद होना दोनों ही देशों के बीच अर्थव्‍यवस्‍था के ल‍िहाज से भी उच‍ित नहीं होगा. आज जो हालात हैं शायद उसको सुधरने में वक्‍त लग सकता है लेक‍िन यह दोनों देशों की व‍िदेश व ट्रेड पॉल‍िसी के तहत उठाये जाने वाले कदमों के बाद ही संभव होगा.

उन्‍होंने कहा क‍ि भारत का अफगान‍िस्‍तान के साथ 3 ब‍िल‍ियन को कारोबार होता है जबक‍ि अमेर‍िका सि‍र्फ 1 ब‍िल‍ियन का ही कारोबार करता है. भारत अफगान‍िस्‍तान के ल‍िये व्‍यापार के ल‍िहाज से बड़ी कंट्री है. उनका कहना है क‍ि फ‍िलहाल मार्केट में अफगान‍िस्‍तान संकट का असर 5 से 7 फीसदी द‍िख रहा है. अगर ऐसा चलता रहा तो आने वाले समय में यह और बढ़ सकता है. ड्राई फ्रूट्स के कई आइटम्‍स ऐसे हैं जो सीधे अफगान‍िस्‍तान से ही नहीं आते दूसरे कई और देशों से भी आते हैं.