जम्मू-कश्मीर में 15 अगस्त के बाद दो जिलों में शुरू होगा 4G इंटरनेट ट्रायल

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जम्मू-कश्मीर 4-जी इंटरनेट बहाली को लेकर केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि 4-जी इंटरनेट सेवा पर से प्रतिबंध जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में ट्रायल के आधार पर 15 अगस्त के बाद हटा लिया जाएगा।

केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि 15 अगस्त के बाद जम्मू तथा कश्मीर संभाग के एक-एक जिले में 4जी इंटरनेट सेवा प्रायोगिक तौर पर शुरू की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट जून में एक गैर सरकारी संगठन ‘फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स’ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन के खिलाफ शीर्ष अदालत के 11 मई के निर्देशों का पालन करने में विफलता की समीक्षा के लिए अवमानना कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी

केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने SC को बताया कि जिन क्षेत्रों में 4G प्रदान किया जा सकता है, उनकी पहचान की जाएगी और फिर 4G सेवाएं दी जाएंगी. SC ने केंद्र के रुख की सराहना की है. एजी ने कोर्ट को बताया कि कुछ क्षेत्रों में सख्त निगरानी के अधीन इंटरनेट प्रतिबंधों को चयनित क्षेत्रों में परीक्षण के आधार पर किया जा सकता है. उन्होंने अदालत को बताया कि समिति का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों के लिए लैंडलाइन के माध्यम से ब्रॉडबैंड की सुविधा उपलब्ध है. विशेष समिति का विचार है कि कम हिंसा वाले क्षेत्रों में उच्च गति के इंटरनेट को ट्रायल  के आधार पर शुरू किया जा सकता है.

जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि ‘आपके द्वारा लिए गए स्टैंड की सराहना करते हैं. लेकिन इस मामले में आदेश सार्वजनिक क्षेत्र में होना चाहिए.’ याचिकाकर्ता ने भी केंद्र और जम्मू और कश्मीर के स्टैंड की भी सराहना की. एजी ने अदालत को सूचित किया कि समिति सीमित क्षेत्रों में परीक्षण के आधार पर हाई स्पीड इंटरनेट की पहुंच प्रदान करने के लिए सहमत हुई है. केंद्र ने कहा है कि 16 अगस्त से जम्मू और कश्मीर डिवीजन के प्रत्येक जिले में छूट दी जाएगी और 2 महीने बाद आकलन किया जाएगा.

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अतिरिक्त हलफनामा दायर किया जा रहा है. उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि ‘इस मुद्दे को लेकर विशेष समिति ने 10 अगस्त को तीसरी बैठक की थी. जम्मू और कश्मीर में स्थानीय एजेंसियों के साथ परामर्श किया गया है. सीमा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विकल्पों पर गौर किया गया है. समिति का विचार है कि जम्मू-कश्मीर में खतरे की धारणा अधिक बनी हुई है. इंटरनेट बैन कोविड के खिलाफ लड़ाई, शिक्षा या व्यवसाय में कोई बाधा पैदा नहीं कर रहा है. वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य की स्थिति को देखते हुए अभी भी मोबाइल फोन के लिए हाई स्पीड इंटरनेट का उपयोग बहाल करने के लिए फिलहाल समय अनुकूल नहीं है.’

बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि कोई संभावना है, तो इसे बहाल किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा था, ‘केंद्र और जम्मू और कश्मीर जांच करें कि क्या ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें 4जी हो सकता है?’ SC ने कहा था कि इस मामले में और देरी नहीं हो सकती. कोर्ट ने केंद्र और जम्मू और कश्मीर प्रशासन को इसपर निश्चित जवाब के साथ आने को कहा था.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उपराज्यपाल के बदलने के चलते जवाब के लिए और समय मांगा था. उसका कहना था कि ‘उपराज्यपाल, जिन्होंने 4G की बहाली के संबंध में बयान दिया था, वो अब नहीं हैं. हमारे पास एक नए एलजी है और उनके विचारों का महत्व अब होगा.’ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ‘हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन किया है और इसमें एक समिति है जो कहती है कि 4 जी का अभी उपयोग नहीं किया जा सकता.’ सुप्रीम कोर्ट ने इसका आधार पूछा.