कोरोना का कहर, दुनिया में महामारी से मरने वालो की संख्या पहुंची 40 लाख के पार

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कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को झकझोरकर रख दिया है. इससे अब भी हर रोज बड़ी संख्या में लोग मर रहे हैं. वैश्विक स्तर पर बुधवार को इस महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 40 लाख के पार हो गई. इस बीच वायरस के बेहद संक्रामक डेल्टा स्वरूप के सामने आने के बाद टीकाकरण को तेजी से अंजाम देने की जद्दोजहद भी बढ़ गई है.

अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आधिकारिक सूत्रों द्वारा संकलित डेढ़ साल में हुई मौतों का यह आंकड़ा पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओसलो के अनुमान के मुताबिक 1982 के बाद दुनिया में जितने युद्ध हुए हैं उनमें मारे गए लोगों के लगभग बराबर है.

यह संख्या हर साल दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने वाले लोगों से तीन गुना ज्यादा है. यह लॉस एंजिलिस या जॉर्जिया की आबादी के बराबर है. यह संख्या हांगकांग की आधी आबादी से ज्यादा या न्यूयॉर्क सिटी की लगभग 50 फीसदी जनसंख्या जितना है.

इसके बावजूद, ज्यादातर का यह मानना है कि यह संख्या वास्तविक संख्या नहीं है क्योंकि या तो कुछ मामले नजर में नहीं आए या कुछ को जानबूझकर छिपाया जा रहा है.

टीकाकरण शुरू होने के बाद से हर दिन होने वाली मौतें घटकर करीब 7,900 पर आ गई जो जनवरी में हर दिन 18,000 से ऊपर हो रहीं थी.

लेकिन हाल के हफ्तों में, पहली बार भारत में मिले वायरस के परिवर्तित स्वरूप डेल्टा ने दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है जो टीकाकरण में सफल रहे अमेरिका, ब्रिटेन और इजराइल जैसे देशों में भी तेजी से फैल रहा है.

असल में, ब्रिटेन में इस हफ्ते एक दिन में जनवरी के बाद से पहली बार संक्रमण के 30,000 से ज्यादा मामले सामने आए जबकि सरकार इस महीने के अंत में लॉकडाउन संबंधी बची हुई सभी पाबंदियां भी हटाने की तैयारी कर रही है.

अन्य देशों ने फिर से एहतियाती उपाय लागू कर दिए हैं और अधिकारी टीका लगाने के लिए अभियान तेज कर रहे हैं.

वहीं, इस आपदा ने सुविधा प्राप्त और अभावग्रस्त देशों के बीच की खाई को बढ़ा दिया है, जहां अफ्रीका और दुनिया के बेहद गरीब देशों में टीकाकरण अभियान बमुश्किल ही शुरू हुए हैं और टीकों की अत्यधिक कमी से जूझ रहे हैं.

अमेरिका और अन्य अमीर देशों ने संघर्ष कर रहे देशों को कम से कम एक अरब टीके देने पर सहमति जताई है.

दुनिया भर में सबसे ज्यादा मौतें अमेरिका में हुई हैं जहां छह लाख लोगों की इस बीमारी के कारण जान चली गई या हर सात में से एक की मौत देश में ही हुई है. इसके बाद 5,20,000 मौतें ब्राजील में हुई हैं जहां माना जा रहा है कि असल संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है जहां राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो की धुर दक्षिणपंथी सरकार ने लंबे वक्त तक वायरस को कमतर आंका.

विश्व स्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) की शीर्ष टीकाकरण अधिकारी एन लिंडस्ट्रेंड ने आगाह किया है कि वायरस के विभिन्न स्वरूप, टीकों तक असान पहुंच और संपन्न देशों द्वारा एहतियातों में ढील “एक जहरीला संयोजन है जो बहुत खतरनाक है.”