महाराष्ट्र समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी, कई राज्यों में बारिश से भारी तबाही

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मौसम और मॉनसूनी बारिश का कहर पहाड़ से लेकर मैदानी राज्यों तक जारी है. मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के कई जिलों में बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है. वहीं दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी बारिश का अनुमान है. भारी बारिश से ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात में काफी नुकसान हुआ है. ओडिशा और तेलंगाना में रविवार को बारिश से जुड़ी घटनाओं में 4 लोगों की मौत हो गई.

मौसम केंद्र ने बताया कि कम दबाव का क्षेत्र बने होने के कारण राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ सोमवार तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है. हालांकि, यह चक्रवात अब कमजोर पड़ रहा है और यह झारखंड तथा पड़ोसी राज्यों की ओर बढ़ गया है. मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली एजेंसी स्काइमेट के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के कुछ इलाकों भारी बारिश हो सकती है.

राष्ट्रीय राजधानी यानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के अधिकतर हिस्सों में लोग गर्मी से बेहाल हैं. इन राज्यों में बारिश का इंतजार है. दिल्ली में रविवार को आर्द्रता का स्तर 91 प्रतिशत पहुंच गया, वहीं अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक है. मौसम विभाग ने दिल्ली में अगले 2 दिन बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया है.

बिलासपुर में बाढ़ में फंसे युवक को इंडियन एयर फोर्स ने चौपड़ की मदद से बाहर निकाला.

बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण भारी बारिश होने से ओडिशा के कई हिस्सों में रविवार को बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई. कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए, फसल को नुकसान पहुंचा और दो लोगों की मौत हो गई. राज्य में भारी बारिश होने से मलकानगिरी, ढेंकानल, भद्रक और कटक जिलों सहित कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. कई गांवों का राज्य के शेष हिस्से से सड़क संपर्क टूट गया है.

तेलंगाना के कई हिस्सों में जबरदस्त बारिश हुई और नागरकुरनूल जिले में एक मकान गिरने से इसमें 80 वर्ष से अधिक उम्र की वृद्ध महिला एवं उनकी 50 वर्षीय पुत्री की मौत हो गई.

छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटे से हो रही लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है. 70 से ज्यादा गांवों का मुख्यालय से सम्पर्क टूट चुका है. शबरी नदी उफान पर है. जिसकी वजह से नेशनल हाईवे 30 पर भी पानी आ गया है. निचली बस्तियो में पानी भरने के बाद इनको खाली करा लिया गया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है. यहां बारिश से बस्तर क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा प्रभावित हुआ है. इस क्षेत्र के बाजपुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों में गुजरने वाली ज्यादातर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

गोदावरी नदी में पानी का स्तर डेंजर लेवल के ऊपर जा चुका है. ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना से जोड़ने वाली सड़क पर पानी भरा है. दोनों तरफ जाम लग जाने से गाड़ियों की लंबी कतार लग गई है. लेकिन इस सबके बीच जान जोखिम में डालकर गांव वाले सड़क पार कर रहे हैं. केरल में इडुक्की जिले में भूस्खलन की घटना में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 58 हो गई है.

गुजरात में 4 दिनों से हो रही बारिश की वजह से गिरमाला वाटरफॉल हाहाकार मचाता हुआ बह रहा है. 100 फीट से ज्यादा उंचाई वाला ये वाटरफॉल डरा रहा है. भारी बारिश की वजह से ये जबरदस्त उफान पर है. वहीं, मूसलाधार बारिश के बाद उफान मारती नदियां सड़क के ऊपर से बह रही हैं. गांववालों ने आने-जाने के लिए रस्सा डाला है ताकि पुल के ऊपर से बहती नदी किसी को बहा ना ले जाए.

कर्नाटक के दावणगेरे जिले में तुंगभद्रा नदी की लहरों के बीच दर्जनों बंदर फंस गए और दो दिनों तक पेड़ पर बैठे रहे. भूखे प्यासे बंदरों का हाल बेहाल था. हालांकि, रेस्क्यू टीम ने बांस की लकड़ियां बांधकर रस्सा डाला और सभी बंदर इस सीढ़ी के जरिए बाढ़ से बाहर आए.
राजस्थान में बह गए 2 बच्चे

राजस्थान में भी बाढ़ कहर बरपा रही है. अलवर में हुई झमाझम बारिश के बाद दो बच्चे खुले नाले में बह गए. बचाव दल ने दोनों बच्चों को नाले से निकालकर अस्पताल पहुंचाया लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

बिहार का दुर्भाग्य है कि कभी बाढ़ तो कभी सूखा. हर साल का यही आलम है. इस बार भी बिहार के 14 जिले बाढ़ की चपेट में हैं. सबसे ज्यादा बेहाल समस्तीपुर है. यहां बागमती नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिसके कारण जिले में 9 प्रखंडों के 135 गांव जलमग्न हो गए हैं. बिहार के समस्तीपुर, अररिया, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, सीवान, सीतामढ़ी, गोपालगंज, दरभंगा, पटना, सुपौल, भागलपुर, पूर्णिया, मधुबनी और कटिहार जिलों में बाढ़ के पानी ने कोहराम मचा रखा है.

दरभंगा में बाढ़ का पानी धीरे धीरे उतरने लगा है, लेकिन संकट खत्म होने में अभी वक्त लगेगा. जिले के कई पंचायत अब भी बाढ़ का कहर झेल रहे हैं. दर्जनों गांव अब भी पानी में डूबे हैं. कभी कोसी का कहर तो कभी बागमती की लहर, बिहार में हर साल इस मौसम में बाढ़ की विभीषिका दिखाई पड़ती है. हर साल पुख्ता इंतजाम के दावे होते हैं, लेकिन हर साल बिहार के तमाम इलाकों में बसे लोगों को बाढ़ का दंश झेलना ही पड़ता है.

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