सुप्रीम कोर्ट ने BS- IV वाहनों के पंजीकरण पर फिलहाल रोक वाले आदेश को अब अगले आदेश तक बढ़ाया

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BS- IV वाहनों के पंजीकरण (Registration of BS-IV compliant vehicles) पर फिलहाल रोक रहेगी. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने पहले वाले आदेश को अब अगले आदेश तक बढ़ाया. जस्टिस अरुण मिश्रा ने मार्च में बेचे गए बड़ी संख्या में वाहनों के बारे में नाराज़गी जताते हुए कहा, ‘धोखाधड़ी’ से कुछ हो सकता है. पिछली बार सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च के बाद वाहन पोर्टल पर बीएस-4 वाहनों को अपलोड करने से संबंधित जानकारी देने के लिए केंद्र सरकार को और वक्त दे दिया था. जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने वाहनों की बिक्री की इजाजत देने संबंधी याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ‘हम ऐसे वाहनों को वापस लेने का आदेश क्यों पारित करे? निर्माताओं को इसकी समयसीमा के बारे में पता था, तो उन्हें इसे वापस लेना चाहिए.’

बेंच ने सरकार को हलफनामा दायर करने के लिए और वक्त देते हुए सुनवाई 31 जुलाई के लिए स्थगित कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथन ने पीठ से गुहार करते हुए कहा था वाहन डीलर्स के पास अब भी BS-IV वाहन पड़े हुए हैं, जिनकी बिक्री नहीं हुई. लिहाजा उन वाहनों को निर्माताओं को वापस करने की अनुमति दी जाए, ताकि निर्माता उन वाहनों को दूसरे देश में निर्यात कर सके.

उन्होंने बताया कि अफ्रीका के कई देश बीएस-4 वाहनों की इजाजत देते हैं. इस पर पीठ ने कहा, ‘हम इसके लिए आदेश क्यों पारित करें? वाहन निर्माताओं को बीएस-4 वाहनों की बिक्री की डेडलाइन के बारे में मालूम था.’ पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि कोरोना के कारण देशभर में किए गए लॉकडाउन के दौरान वाहनों की इतनी बिक्री कैसे हुई? शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह बात का परीक्षण करेगी कि इन बिक्री को लेकर हुई लेनदेन वाजिब है या नहीं. कहीं ये लेनदेन बैक डेटेड तो नहीं है? वास्तव में सुप्रीम कोर्ट वाहनों की बिक्री के आंकड़ों को देखकर हैरान था.

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन लागू था, ऐसे में इस दौरान बीएस-4 वाहनों की बिक्री कैसे हुई. इसी वजह से शीर्ष कोर्ट ने अपने 27 मार्च के उस आदेश को वापस ले लिया था जिसमें लॉकडाउन खत्म होने के बाद 10 दिनों तक बचे हुए बीएस-4 वाहनों को बिक्री की अनुमति दी गई थी. पीठ ने कहा था, ‘दो रास्ते नहीं हो सकते कि लॉकडाउन के दौरान भी गाड़ी बेची जाए और लॉकडाउन खत्म होने के बाद 10 दिन का ग्रेस पीरियड भी मिले. ये अदालत के आदेश की भावनाओं के खिलाफ होगा.’

कोर्ट ने कहा था कि जिन वाहनों के लिए रकम ले ली गई है लेकिन उन्हें बेचा न गया हो तो वह वाहन डीलर का माना जाएगा और खरीददार के पैसे वापस करने होंगे. पीठ ने कहा, ‘हमने लॉकडाउन को देखते हुए 31 मार्च के बाद बिक्री की इजाजत दी थी लेकिन जो आंकड़े हमारे पास आए हैं वह बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान वाहनों की बिक्री बिना लॉकडाउन की अवधि के मुकाबले अधिक हुई.’

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन द्वारा सात जुलाई को दायर हलफनामे में कहा गया है कि 12 मार्च से 31 मार्च तक सदस्य डीलरों ने 61,861 बीएस-4 वाहनों की बिक्री की है, जबकि गैर-सदस्य डीलरों ने इस दौरान 7,25,321 बीएस-4 वाहनों की बिक्री की है. इन आंकड़ों के मुताबिक, 29, 30 और 31 मार्च को अधिक गाड़ियां बेची गईं. साथ ही हलफनामे में यह भी कहा गया है कि डीलर सदस्यों ने 7,758 वाहनों का जबकि गैर सदस्य डीलरों ने 17,145 गाड़ियों की जानकारी ‘वाहन’ पोर्टल पर नहीं दी है.

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