रेलवे: वंदे भारत ट्रेन के निर्माण में ‘आत्मनिर्भर भारत’ होगी प्राथमिकता

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चीन के साथ सीमा तनाव के बीच रद्द कर दी गई 44 वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण की निविदा जल्द ही दोबारा जारी होगी। इस बार निविदा के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ योजना को प्राथमिकता दी जाएगी।

उन्हीं कंपनियों को निविदा में भाग लेने का मौका मिलेगा, जो भारत में ही ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इन ट्रेनों का निर्माण करेंगी। इन ट्रेनों के निर्माण में स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल फिलहाल तय 50 फीसदी के बजाय ज्यादा से ज्यादा मात्रा में किया जाएगा।
इतना ही नहीं इन ट्रेनों के डिब्बे भी कोविड-19 (कोरोना वायरस) महामारी के प्रभाव को बचाने के लिहाज से डिजाइन किए जाएंगे। रेलवे का दावा है कि नए सिरे से मेक इन इंडिया के तहत निर्माण की गाइड लाइंस तैयार करने के बाद अगले एक सप्ताह में नई निविदा जारी कर दी जाएगी।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने रविवार को बताया कि नई निविदा में वंदे भारत ट्रेन का निर्माण भारतीय रेलवे की तीनों उत्पादन इकाइयों में करने का प्रावधान रखा जाएगा। साथ ही इन ट्रेनों को बनाने की समयीसीमा भी घटाई जाएगी। 

इससे पहले रेलवे की इंटिग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई ने 10 जुलाई को 44 वंदे भारत ट्रेन बनाने के लिए निविदा निकाली थी। जब यह निविदा खोली गई तो 16 डिब्बे वाली इन 44 ट्रेनों के इलेक्ट्रिकल उपकरणों समेत अन्य सामान की आपूर्ति के लिए कुल छह कंपनियों ने दावेदारी पेश की थी। इनमें एक चीनी संयुक्त उद्यम कंपनी सीआरआरसी पायनियर इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल थी।

अन्य कंपनियों में सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, द भारत इंडस्ट्रीज संगरूर, द इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, द मेधा सर्वो ड्राइवर्स प्राइवेट लिमिटेड और पॉवरनेटिक्स इक्विपमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल थे। बाद में इस पूरी निविदा प्रक्रिया को टेंडर कमेटी की सलाह पर रद्द कर दिया गया था।

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