भारत-चीन के बीच अब भी तनाव, आज दौलत बेग ओल्डी में मेजर जनरल स्तर की वार्ता जारी

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भारत ने कहा है कि वह उम्मीद करता है कि चीन पूर्वी लद्दाख में पूर्ण रूप से पीछे हटने और तनाव की समाप्ति सुनिश्चित करने के लिये गंभीरता से काम करेगा जैसा कि पिछले महीने दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों ने निर्णय किया था. बता दें कि दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों और कमांडर स्तर की बातचीत के बावजूद अब भी तनाव का माहौल पूरी तरह शांत नहीं हुआ है.

एलएसी पर यथास्थिति बहाल करने के लिए कमांडर स्तर बातचीत से कोई पुख्ता हल नहीं निकला. इसके बाद अब तनाव को कम करने के लिए आज मेजर जनरल स्तर की वार्ता हो रही है. सेना के सूत्रों के मुताबिक यह बातचीत दौलत बेग ओल्डी इलाके में हो रही है. इस बैठक में भारत की तरफ से मेजर जनरल अभिजीत बापट शामिल हुए हैं.

इस बातचीत का अहम मुद्दा है डेपसांग इलाक़े में चीनी सेना की तैनाती और उनकी तोपों के साथ लगातार भारत के ऊपर दवाब बनाने की कोशिश. बातचीत 11 बजे शुरू हो चुकी है. भारतीय सेना की बॉटलनेक इलाक़े में पेट्रोलिंग को इस समय चीनी सेना ने रोका हुआ है इसीलिए PP-10, PP-11, PP-11A, PP-12 ,PP-13 के दबाव को कम करने के लिए ये बातचीत की जा रही है. 2013 में भी चीन ने 21 दिन का फ़ेस ऑफ़ इसी डेपसांग इलाक़े में किया था.

गौरतलब है कि भारतीय और चीनी सेना के शीर्ष कमांडरों के बीच रविवार को पांचवें चरण की बातचीत हुई थी जो लगभग 11 घंटे तक चली. वार्ता की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि बातचीत के दौरान भारत ने पैंगोंग सो और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास टकराव वाले सभी स्थानों से चीनी सैनिकों के जल्द से जल्द पूरी तरह पीछे हटने को लेकर जोर डाला था.

उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष ने यथाशीघ्र चीनी सैनिकों को पूरी तरह हटाने पर जोर दिया और पूर्वी लद्दाख के सभी क्षेत्रों में पांच मई से पहले वाली स्थिति की तत्काल बहाली पर भी जोर दिया, जब पैंगोंग सो में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के कारण सीमा पर तनाव उत्पन्न हो गया था.

सूत्रों ने कहा कि चीनी सेना गलवान घाटी और टकराव वाले कुछ अन्य स्थानों से पहले ही पीछे हट चुकी है, लेकिन भारत की मांग के अनुसार पैंगोंग सो में फिंगर इलाकों से सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है. भारत इस बात पर जोर देता आ रहा है कि चीन को फिंगर-4 और फिंगर-8 के बीच वाले इलाकों से अपने सैनिकों को वापस बुलाना चाहिए.

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