राइफल से लेकर मिसाइल तक ‘आत्मनिर्भर’ भारत, देसी हथियारों से सुरक्षा करेगा अब हिंदुस्तान

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चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों के बीच भारत अपनी रक्षा जरूरतों की पूर्ति के लिए भारी संख्या हथियारों को आयात करता रहा है. हर साल अरबों रुपये इसमें खर्च होते हैं, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर होने के मंत्र को साकार करने की कोशिश तेज हो रही है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को इसका ऐलान किया. फैसले के मुताबिक अब भारत 101 हथियारों को विदेशों से आयात नहीं करेगा, बल्कि इन हथियारों को देश में ही बनाया जाएगा. हथियार इम्पोर्ट करने के मामले में सऊदी अरब पहले नंबर पर है और इसके बाद नाम आता है भारत का. ये तैयारी चीन और पाकिस्तान की साजिशों वाली जुगलबंदी को मात देने के लिए बहुत जुरूरी है.

अरबों रुपये इसमें खर्च होते हैं. यही वजह है कि इस दिशा में भी आत्मनिर्भर होना वक्त की मांग है. राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्रालय अब आत्मनिर्भर भारत की पहल को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. मंत्रालय ने 101 उन रक्षा उपकरणों की सूची तैयार की है जिनके आयात पर रोक लगेगी. रक्षा क्षेत्र में उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. ये रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है.

जिन 101 उपकरणों पर विदेश से आयात पर रोक लगी है उसमें बड़े हथियार शामिल हैं. इस सूची में छोटे पार्ट्स की जगह उच्च तकनीक वाले हथियार सिस्टम भी हैं जैसे- शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल, शिप बॉर्न क्रूज मिसाइल, असॉल्ट राइफल, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, रडार और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, बैलिस्टिक हेलमेट और बुलेट प्रूफ जैकेट.

सरकार ने रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लक्ष्य तय कर दिए हैं और ये टाइम बाउंड भी होगा. तय किया गया है कि 101 बैन किए गए हथियारों में 69 पर रोक दिसंबर से लागू होगी, बल्कि बचे हुए 31 हथियार 2024 तक आयात होने बंद हो जाएंगे.

सरकार ने घरेलू रक्षा उत्पादन के लिए 52 हजार करोड़ रुपये का अलग से बजट निर्धारित किया है. नई रक्षा नीति के मुताबिक अगले 5 साल में 35 हजार करोड़ तक विदेशों से हथियार आयात किए जाएंगे जबकि घरेलू रक्षा उपकरणों को 1 लाख 40 हजार करोड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य है. ये बजट आज की तुलना में लगभग दोगुना है.

ये सच्चाई है कि हथियार की जरूरतों को पूरा करने में भारत काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर है. लेकिन मौजूदा सरकार की कोशिश इस निर्भरता को कम करने की है. साथ ही देसी रक्षा उद्योग को हर चुनौतियों के लिये तैयार करना भी है. सरकारी के प्रोत्साहन से घरेलू रक्षा कंपनियों का उत्साह बढ़ेगा और वो उन सामानों को खुद बना सकेंगी जिन्हें अब तक बाहर से मंगाया जाया था. कुल मिलाकर ये देसी रक्षा कंपनियों में जान फूंकने वाला कदम है.

भारत हथियारों की होड़ में शामिल नहीं है और ना ही पड़ोसियों को धमकाता है. भारत की परमाणु नीति में युद्ध भी है और बुद्ध भी है, लेकिन चीन की साजिश और पाकिस्तान से सीधे भिड़ंत सरहद की हकीकत है तो ऐसे में भारत के लिए हथियार खरीदना मजबूरी ज्यादा है और अब इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना सबसे बड़ी जरूरत है.

लेकिन यहां अपनी ताकत और कमजोरी दोनों को भी समझना चाहिए. भारत हथियार बनाने को तैयार है और इस ओर बड़ी कोशिश भी हो रही है, लेकिन ये सच्चाई है भारत के सामने चीन और पाकिस्तान जैसे देशों का खतरा है. आतंकवाद से सेना जूझ भी रही है. ऐसे में सेना को बेहतर हथियार भी मिलनी चाहिए.

इसको समझने के लिए हमें हथियारों को परखना होगा. मसलन इंसास राइफल और अमेरिका से खरीदी गई SIG 716 असॉल्ट राइफल को देखें तो भारतीय सेना अभी इंसास राइफल का इस्तेमाल करती है. ये राइफल बेहद कारगर है और पूरी तरह से स्वदेशी भी है, लेकिन भारत अमेरिका से SIG 716 असॉल्ट राइफल भी आयात कर रहा है. अगर इसकी तुलना इंसास से की जाती है तो ये राइफल थोड़ी कमजोर दिखती है.

इंसास राइफल की रेंज 400 मीटर की है जबकि SIG 716 की रेंज 500 मीटर है यानी 100 मीटर ज़्यादा. इंसास 5.56 एमएम बोर की राइफल है जबकि SIG 716 7.62 MM बोर की राइफल है यानी इंसास में SIG 716 की तुलना में छोटी गोली का इस्तेमाल होता है. इंसास से प्रति मिनट 600 राउंड गोली चलाई जा सकती है. वहीं SIG 716 राइफल से प्रति मिनट 650 राउंड गोली दागी जा सकती है. SIG 716 को क्लोज और लॉन्ग काम्बैट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. यानी स्वदेशी हथियार बनाना तो अच्छा है लेकिन हमें इसकी क्वालिटी में सुधार भी करना होगा. सही मायनों में तभी भारत विदेशी हथियारों पर निर्भरता से बाहर निकल पाएगा.

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