लुधियाना में कोरोना वक्सीनशन के दूसरे दिन ड्राई रन की व्यवस्था पटरी से उतरी, जानें क्या-क्या रही कमियां

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जिले में दो दिन के कोरोना वैक्सीनेशन के मंगलवार को दूसरा चरण में ड्राई रन चलाया गया। यह ट्रायल दो दिन के लिए था। पहले दिन सोमवार को सेहत विभाग की ओर से डमी वैक्सीन लगाने के गए इस प्रक्रिया के लिए किए गए प्रबंधों को जांचा गया। मगर मंगलवार को सिविल अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड अस्पताल में ड्राई रन की व्यवस्था पटरी से उतरी नजर आई। सरकारी दफ्तरों में तो पहले ही अकसर स्टाफ के लेट आने की शिकायतें आती रहीं हैं और ड्राई रन के दूसरे दिन भी यही दिखा।

पहले लाभार्थी के तौर पर पहुंचे डा. विवेक जब वैक्सीन कक्ष में पहुंचे, तो वहां तैनात की वैक्सीनेटर दविंदर कौर रिहर्सल को सच समझ बैठी। उन्होंने डा. विवेक को जर्सी ऊपर करके बाजू बाहर निकालने को कहा और उसने उन्हें सुई लगाने के लिए खुद एक सिरिंज खोल दी। तभी नोडल अफसर डा. रेणु गुप्ता तुरंत वहां पहुंची। उन्होंने वैक्सीनेटर को समझाया कि किसी को सुई लगानी नहीं है और न ही सिरिंज खोलकर खराब करनी है। यह केवल रिहर्सल है, जिसमें किसी के शरीर से सुई टच नहीं करनी।

ड्राई रन के अंतिम दिन 25 हेल्थ केयर वर्करों को लाभार्थी के तौर कोविन टेस्ट पोटल पर रजिस्टर्ड किया गया था। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार इनमें से करीब चार लाभार्थी माक ड्रिल के लिए सेशन साइट पर नहीं पहुंचे। फिर इनकी जगह पर दूसरे स्टाफ को लाभार्थी बनाकर वेक्सीनेशन प्रक्रिया में शामिल कर गिनती पूरी कर ली गई। हालांकि अस्पताल की एसएमओ डा. अमरजीत कौर ने इससे इन्कार किया और कहा कि केवल एक लाभार्थी परिवार में किसी के बीमार होने के कारण नहीं आई।

कार्यक्रम चार्ट के मुताबिक सुबह 9 से 11 बजे तक दो घंटे में 25 लाभपात्रियों को डमी वैक्सीन लगाई जानी थी। इस तरह एक लाभपात्र को मात्र 4.8 मिनट का समय दिया गया। यानि इतने समय में ही उसे गेट की एंट्री से लेकर आब्जर्वेशन रूम तक जाना है जबकि ऐसा असंभव है। क्योंकि इस सारी प्रक्रिया के लिए कम से कम 10 मिनट लगेंगे। मंगलवार को जब डा. विवेक पहुंचे, तो उन्हें भी इस पक्रिया में दस मिनट से अधिक समय लगा।