म्यूकोरमाइकोसिस: तेजी से बढ़ रहा नया खतरा, कोविड से ठीक हुए मरीजों को हो रहा ब्लैक फंगस, सूरत में निकालनी पड़ीं 8 मरीजों की आंखें

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    कोरोना वायरस के साथ-साथ देश में अब ब्लैक फंगस का भी खतरा बढ़ रहा है। गुजरात में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कोरोना से ठीक हुए मरीजों में ब्लैक फंगस भी देखा गया है। इन मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है क्योंकि गुजरात में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े हैं। 

    गुजरात के सूरत में म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) से आठ मरीजों ने अपनी आंख की रोशनी खो दी है। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। पिछले 15 दिनों में सूरत में म्यूकोरमाइकोसिस के 40 मामले सामने आए हैं, जिनमें से आठ मरीजों की आंख की रोशनी चली गई है। ये संक्रमण, कोरोना की वजह से फैल रहा है और इसका इलाज हो सकता है। लेकिन अगर इलाज में देरी हो जाए या इलाज न मिले तो इससे मरीज की मौत भी हो सकती है। 

    डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा खतरा
    अहमदाबाद सिविल डेंटल कॉलेज के डीन गिरीश परमार के बताए अनुसार, म्यूकोरमाइकोसिस जैसे खतरनाक रोग का सबसे ज्यादा खतरा डायबिटीज के उन मरीजों को है, जिन्होंने कोरोना में स्टेरॉइड लिया है। सिविल अस्पताल में उपचार करा रहे 80 में 60 मरीज ऐसे ही हैं।

    मजबूत दांतो को भी हिला देता है फंगल इंफेक्शन
    डॉ़. गिरीश बताते हैं कि इस बीमारी में आंख, कान और दांत में इंफेक्शन होने लगता है। चेहरे पर सूजन आने लगती है। धीरे-धीरे इसका असर मस्तिष्क पर होने लगता है। फंगल इंफेक्शन इतना खतरनाक होता है कि मजबूत दांतों को भी कुछ दिनों में कमजोर कर देता है। इससे चेहरे के रंग लाल हो जाता है। वहीं, आंख और नाक के नीचे सूजन आ जाती है, जिससे तेज दर्द होता है।

    कोरोना की दूसरी लहर में बढ़े म्यूकोरमाइकोसिस के मामले
    डॉ़. गिरीश बताते हैं कि इसके मामले कोरोना की पहली लहर में भी सामने आए थे, लेकिन तब ऐसे मरीजों की संख्या बहुत कम थी। पिछले साल इसके 5-7 मामले ही सामने आए थे और समय पर इलाज मिलने के चलते सभी स्वस्थ भी हो गए थे। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर बहुत खतरनाक है, जो इंसानों के शरीर को बहुत कमजोर कर रही है। इसके चलते म्यूकोरमाइकोसिस के मामले भी बढ़ गए हैं। इस दौरान 22 मरीज तो डेंटल हॉस्पिटल में ही एडमिट हैं। इनमें से 4-5 की सर्जरी भी करनी पड़ी है।

    नाक से शुरू होता म्यूकोरमाइकोसिस
    डायबिटीज वाले पेशेंट में कोविड की वजह से फंगल इंफेक्शन हो जाता है। अमूमन यह नाक से शुरू होता है और नेजल बोन और आंखों को खराब कर सकता है। यह जबड़ों को भी चपेट में लेता है। ऐसे मरीजों को नाक में सूजन या अधिक दर्द हो आंखों से धुंधला दिखाई दे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए। यह आंख की पुतलियों या आसपास का एरिया पैरालाइज्ड कर सकता है। ज्यादा दिन बीत जाएं तो दिमाग में इंफेक्शन बढ़ने का खतरा हो जाता है।

    किन मरीजों के लिए ज्यादा खतरा
    कई राज्यों में कोविड पेशेंट में म्यूकोरमाइकोसिस डिजीज होने के मामले सामने आ चुके हैं। साइनस के कई मरीजों में यह समस्या आती है, लेकिन कोविड पेशेंट के लिए ज्यादा खतरनाक है। खासतौर पर जिन्हें डायबिटीज है या उनकी इम्युनिटी कमजोर है। कोविड होने के बाद ऐसे लोगों को डायबिटीज पूरी तरह कंट्रोल करना जरूरी हो जाता है। इसलिए इम्युनिटी बढ़ाना ही बेहतर विकल्प है। यदि इंफेक्शन होता है तो मेनिनजाइटिस और साइनस में क्लोटिंग का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए इसके लक्षण दिखने पर घरेलू उपचार न करें, सीधे डॉक्टर के पास जाएं।

    जुकाम व आंख के नीचे सूजन है शुरुआती लक्षण
    अहमदाबाद के सिविल अस्पताल की डॉक्टर बेलाबेन प्रजापति ने बताया कि शुरुआती लक्षणों में मरीज को पहले जुकाम होता है। इसके बाद ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास ही नहीं जाते और घरेलू इलाज शुरू कर देते हैं, जिससे इंफेक्शन फैलता चला जाता है। कुछ समय बाद कफ जम जाता है और फिर नाक के पास गांठ बन जाती है। इस गांठ का सीधा असर आंखों पर होता है, जिसके बाद आंखें चिपकने लगती हैं और सिर में तेज दर्द होने लगता है। इसीलिए आंख, गाल में सूजन और नाक में रुकावट अथवा काली सुखी पपड़ी पड़ने के तुरंत बाद एंटी-फंगल थैरेपी शुरू करा देना चाहिए।