नस्ली असमानता क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका में बहुत लम्बे समय से है : जॉन्टी रोड्स

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साउथ अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड पिछले कुछ दिनों से विवादों में है। बोर्ड के अधिकारियों के बीच अनबन का खामियाजा देश की क्रिकेट को उठाना पड़ रहा है। रंग भेद से पूरी दुनिया में लोग परेशान हैं लेकिन इन दिनों साउथ अफ्रीका क्रिकेट में कुछ घटनाओं की वजह से इसका मामला दोबारा सामने आया है।

जोंटी रोड्स का मानना है कि दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट में लंबे समय से चला आ रहा प्रशासनिक संकट राष्ट्रीय टीम के उतार-चढ़ाव वाले प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार है और वह मानते हैं कि नस्ली असमानता अब भी देश के तंत्र का हिस्सा है। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) को वित्तीय परेशानियों के साथ अपने खिलाडि़यों से नस्ली भेदभाव के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।

अध्यक्ष क्रिस नेनजानी ने पिछले महीने पद से इस्तीफा दे दिया। वह सात साल तक इस पद पर रहे,जिस दौरान भ्रष्टाचार के कई आरोप लगते रहे। अब ऐसे समय में दक्षिण अफ्रीका के सबसे सफल कप्तान ग्रीम स्मिथ के रूप में उम्मीद की किरण नजर आ रही है,जो इस समय सीएसए के क्रिकेट निदेशक हैं।

रोड्स ने 2014 अभियान का जिक्र करते हुए कहा, ‘ग्रीम स्मिथ की पिछले कुछ समय से काफी आलोचना हो रही है, लेकिन वह टीम के कप्तान थे जिन्होंने पहला टीम संस्कृति शिविर कराया और वह प्रोटिया फायर के विचार के साथ आए।’

इस अभियान में विनम्रता, लचीलापन, अनुकूलनशीलता, एकता और सम्मान के अलावा देश के दूत बनने पर ध्यान लगाया गया था। दक्षिण अफ्रीका के 30 पूर्व खिलाडि़यों ने नस्ली भेदभाव के आरोप लगाए हैं जिसमें एश्वेल प्रिंस और मखाया नतिनी शामिल हैं जिसके बाद पिछले महीने 32 खिलाड़ियों की राष्ट्रीय टीम का संस्कृति शिविर लगाया गया। रोड्स ने कहा, ‘मेरे लिए दुखद बात यह है कि शीर्ष 30 खिलाड़ी खेल के लिए एक साथ काम करना चाहते हैं, लेकिन प्रशासनिक तंत्र में इतना अराजकता है कि इसका असर मैदान पर पड़ता है।’